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शरद पवार की एनसीपी पर संकट: उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट का असर

महाराष्ट्र के प्रमुख नेता शरद पवार की एनसीपी में संकट गहराता जा रहा है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना में आंतरिक विवादों के चलते एनसीपी के सांसदों के टूटने की संभावना बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी ने पिछले लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में स्थिति बदल गई। जानें इस राजनीतिक उठापटक के पीछे की कहानी और शरद पवार की संभावित रणनीतियाँ।
 

शरद पवार की पार्टी में उठापटक


महाराष्ट्र के प्रमुख मराठा नेता शरद पवार की स्थिति मानसून सत्र से पहले चुनौतीपूर्ण हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना में आंतरिक विवादों के चलते एनसीपी में बेचैनी बढ़ गई है। महाविकास अघाड़ी, जिसमें कांग्रेस, उद्धव और शरद पवार की पार्टियां शामिल हैं, ने पिछले लोकसभा चुनाव में 48 में से 31 सीटें जीती थीं। लेकिन विधानसभा चुनाव में इन पार्टियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।


उद्धव ठाकरे के सांसदों में से छह या सात एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की संभावना है। इस बीच, शरद पवार की एनसीपी के आठ सांसदों में से पांच या छह के पार्टी छोड़ने की चर्चा चल रही है।


सूत्रों के अनुसार, एनसीपी के नेता शरद पवार पर दबाव बना रहे हैं कि वे अपनी पार्टी का विलय सुनेत्रा पवार की एनसीपी के साथ कर दें। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो कई सांसद और विधायक पार्टी बदल सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनके सांसद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के संपर्क में हैं।


अगर विलय होता है, तो शरद पवार के खेमे के कुछ सदस्यों को महाराष्ट्र सरकार में स्थान मिल सकता है, और उनकी बेटी सुप्रिया सुले को मोदी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है। इस प्रकार, परिवार के सभी सदस्यों की राजनीतिक भूमिकाएं स्पष्ट हो जाएंगी। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र में और सुप्रिया दिल्ली में राजनीति करेंगी। हालांकि, यह देखना होगा कि सुनेत्रा पवार इस व्यवस्था में कितनी सहज होंगी। उनके बेटे पार्थ पवार के लिए भी बड़ी योजनाएं हैं, और परिवार का एकजुट होना आवश्यक प्रतीत होता है। वर्तमान में, शरद पवार की पार्टी पर संकट के बादल छाए हुए हैं।