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शरद पवार ने पीएम मोदी की सराहना की, कहा- देश के लिए कर रहे हैं काम

राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने हाल ही में पीएम मोदी की सराहना की, यह कहते हुए कि राजनीतिक विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन देश का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने पुणे में एक कार्यक्रम में यह बात कही और अपनी युवावस्था की यादों को साझा किया, जिसमें जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात का किस्सा भी शामिल था। पवार ने इंदिरा गांधी के एक महत्वपूर्ण किस्से का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करने की बात की।
 

राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश का सम्मान महत्वपूर्ण


शरद पवार ने कहा- राजनीतिक विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन देश का सम्मान सर्वोपरि है


मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी राजनीतिक सोच पीएम मोदी से भिन्न हो, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए कार्यरत हैं।


पवार ने यह भी कहा कि जब भी राष्ट्रीय हित में सामूहिक प्रयास करने का अवसर मिले, सभी को एकजुट होकर आगे आना चाहिए।


उन्होंने पुणे में लक्ष्मणराव गुट्टे रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित पूर्व राज्य और जिला पदाधिकारियों के सम्मान समारोह में यह बात कही।


युवावस्था की यादें और नेहरू से मुलाकात

पवार ने अपनी युवावस्था की यादों को साझा करते हुए बताया कि 1958 में 18 साल की उम्र में वे बारामती से पुणे आए थे। उन्होंने कहा कि उस समय उनके शहर में कॉलेज नहीं था।


उन्होंने युवा आंदोलन से राजनीति की शुरुआत की और चार साल बाद पुणे सिटी यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बने। पवार ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात उनके जीवन की सबसे यादगार घटनाओं में से एक थी।


उन्होंने बताया कि नेहरू से मिलने के दौरान उन्होंने कई सवाल तैयार किए थे, लेकिन नेहरू के प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वे सब भूल गए।


इंदिरा गांधी का किस्सा

पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि सोवियत संघ के दौरे के दौरान इंदिरा गांधी ने महसूस किया कि भारत के प्रधानमंत्री को उचित सम्मान नहीं दिया गया।


उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने सोवियत अधिकारियों से कहा था कि वे भारत के 40 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती हैं और यदि उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान नहीं किया गया, तो वे इसे स्वीकार नहीं करेंगी।