शशि थरूर ने चुनाव आयोग के दावे पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी पर उठे संदेह
चुनाव आयोग का विवाद
चुनाव आयोग का विवाद: भारत निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को यह दावा किया था कि एआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 में जोड़े गए नए घोषणा-पत्र को सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकृति दी है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान इस दावे को खारिज कर दिया। इस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने सवाल उठाए हैं कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला? किसके आदेश पर और किस अधिकार से इसे बदला गया?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “जो तुमने आँख मूँदी है, अँधेरा हो गया गहरा। तुम्हारे जागने से ही, तो लगना था यहाँ पहरा। बताओ, आजकल मालूम है सबको सियासत फिर, नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है औ’ कौन है मोहरा?” उन्होंने आगे कहा, “Modified Form 6 has not been approved by us. Let us be very clear.” — मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत। तो फिर सवाल सीधा है: जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला? किसके आदेश पर बदला? और किस अधिकार के तहत बदला?
“जो तुमने आँख मूँदी है, अँधेरा हो गया गहरा।
तुम्हारे जागने से ही, तो लगना था यहाँ पहरा।बताओ, आजकल मालूम है सबको सियासत फिर,
नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है औ’ कौन है मोहरा?”“Modified Form 6 has not been approved by us. Let us be very clear.”
— मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांततो फिर सवाल सीधा है:
जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला? किसके आदेश पर बदला? और किस अधिकार के तहत बदला?भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने आज साफ़ कहा कि अभिलेख सामने आने पर सर्वोच्च न्यायालय यह देखना चाहेगा कि “किसने क्या संशोधन किया है।”
चुनाव आयोग ने पहले सर्वोच्च न्यायालय के मई के फ़ैसले का हवाला देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा को न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त बताया था। लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मतदाता सूची कोई प्रयोगशाला नहीं है।
प्रपत्र 6 कोई मामूली काग़ज़ नहीं है।
यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार/मताधिकार से जुड़ा दस्तावेज़ है।
अब देश जानना चाहता है-
प्रपत्र 6 किसने बदला?
क्यों बदला?
किसकी अनुमति से बदला?
और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति का दावा किस आधार पर किया गया?
इन सवालों के जवाब चाहिए।
साफ़ और सार्वजनिक जवाब।
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) October 6, 2026
थरूर ने आगे लिखा, “चुनाव आयोग ने पहले सर्वोच्च न्यायालय के मई के फ़ैसले का हवाला देते हुए इस अतिरिक्त घोषणा को न्यायालय की स्वीकृति प्राप्त बताया था। लेकिन आज सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मतदाता सूची कोई प्रयोगशाला नहीं है। प्रपत्र 6 कोई मामूली काग़ज़ नहीं है। यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार/मताधिकार से जुड़ा दस्तावेज़ है। अब देश जानना चाहता है- प्रपत्र 6 किसने बदला? क्यों बदला? किसकी अनुमति से बदला? और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति का दावा किस आधार पर किया गया? इन सवालों के जवाब चाहिए। साफ़ और सार्वजनिक जवाब।”
सुप्रीम कोर्ट का बयान
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए सीजेओई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह कोर्ट रिकॉर्ड की जांच करके यह पता लगाएगी कि फार्म-6 में बदलाव किसने किए हैं? सीजेआई ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी भी बदले हुए स्वरूप को मंजूरी नहीं दी है। यह बात साफ होनी चाहिए। जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि इसमें बदलाव किसने किया है?”