शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: वैश्विक राजनीति में नया मोड़
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया की यात्रा पर जा रहे हैं, जो वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे सकता है। इस दौरे के दौरान, जिनपिंग और किम जोंग उन की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिनपिंग ने विदेश यात्रा कम की है, लेकिन इस बार उनका उत्तर कोरिया जाना चीन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस दौरे का महत्व और चीन-उत्तर कोरिया संबंधों पर इसके प्रभाव के बारे में।
Jun 7, 2026, 15:29 IST
शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस दौरे और प्योंगयांग में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ उनकी मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें हैं। पिछले साल, दोनों नेताओं की मुलाकात बीजिंग में हुई थी, जब चीनी सेना ने एक भव्य परेड का आयोजन किया था। इस बार, जिनपिंग का उत्तर कोरिया जाना विशेष है, क्योंकि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपने विदेशी दौरे कम कर दिए हैं। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे प्रमुख नेता बीजिंग में उनसे मिले थे, लेकिन 2019 के बाद यह पहली बार है जब शी जिनपिंग खुद प्योंगयांग जा रहे हैं।
जिनपिंग के दौरे का महत्व
'अल जजीरा' की एक रिपोर्ट के अनुसार, क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट विलियम यांग का कहना है कि जिनपिंग अब विदेश यात्रा कम करते हैं। वर्तमान में, यह आम बात हो गई है कि विश्व के प्रमुख नेता बीजिंग में उनसे मिलने आते हैं। ऐसे में, शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया जाना इस बात का संकेत है कि चीन इस यात्रा को कितनी गंभीरता से ले रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2019 के बीच, जिनपिंग हर साल औसतन 14 विदेशी दौरे करते थे, लेकिन 2022 से 2025 के बीच यह संख्या घटकर केवल छह रह गई है।
चीन और उत्तर कोरिया के संबंध
पारंपरिक दृष्टिकोण से, चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों में हमेशा चीन का वर्चस्व रहा है। अमेरिका की 'नेशनल कमिटी ऑन नॉर्थ कोरिया' के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया अपने व्यापार के लिए 95 प्रतिशत तक चीन पर निर्भर था। हालाँकि, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के आरंभ के बाद से इस क्षेत्र के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी
यूक्रेन युद्ध के दौरान, उत्तर कोरिया ने रूस को खुलकर सहायता प्रदान की है। उसने रूस को खतरनाक हथियार, तोपें और अपने सैनिकों की मदद की है, जिससे रूस को युद्ध में काफी लाभ मिला है। 2023 के बाद से, मॉस्को ने उत्तर कोरिया को लगभग 14.4 अरब डॉलर का भुगतान किया है, जिसके बदले में उसने सैनिकों की तैनाती, तोपखाने और बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदी हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र की राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं।