शेख हसीना का साहसिक निर्णय: मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटेंगी
शेख हसीना का ऐलान
नई दिल्ली - बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत से अपने देश लौटने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह दिसंबर में हर हाल में ढाका वापस जाएंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तारी या मौत की सजा का सामना करना पड़े। एक ईमेल इंटरव्यू में हसीना ने कहा कि अगर उनकी किस्मत में मौत है, तो वह किसी अन्य देश में रहने के बजाय अपने देश और अपने लोगों के बीच अंतिम सांस लेना चाहेंगी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
शेख हसीना ने बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह 1996 से 2001 और फिर 2009 से अगस्त 2024 तक प्रधानमंत्री रहीं। हालांकि, अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए बड़े आंदोलन और हिंसक प्रदर्शनों के कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद वह भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं।
मौत की सजा का मामला
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप में मुकदमा चलाया गया। 2025 में एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मौत की सजा सुनाई, जिसमें उन पर आरोप था कि उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई करने का आदेश दिया। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस आंदोलन में लगभग 1,400 लोगों की जान गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे।
राजनीतिक साजिश का आरोप
हसीना ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को बार-बार खारिज किया है। उन्होंने विशेष न्यायाधिकरण के फैसले को अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है, और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वह अपने देश लौटने का निर्णय ले चुकी हैं और संभावित कानूनी कार्रवाई या जान के खतरे के बावजूद अपने रुख में कोई बदलाव नहीं करेंगी।