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श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से दिया इस्तीफा

श्रीनगर से लोकसभा सदस्य आगा रुहुल्ला मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व पर अनुच्छेद 370 की बहाली के वादों से मुकरने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए एक नए राजनीतिक संगठन की संभावना का संकेत दिया। मेहदी ने अपने इस्तीफे को 'आजादी का फरमान' बताया और कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा और सम्मान को बहाल करने के लिए एक आंदोलन शुरू करना चाहते हैं।
 

नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफे की घोषणा


नई दिल्ली। श्रीनगर से लोकसभा सदस्य सैयद आगा रुहुल्ला मेहदी ने मंगलवार को अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित रैली में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व पर अनुच्छेद 370 की बहाली सहित चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।


लोकसभा अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा

इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद, रुहुल्ला ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया। मेहदी ने 2024 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के टिकट पर श्रीनगर सीट से चुनाव जीते थे।


नए राजनीतिक संगठन की संभावना

रुहुल्ला ने अपने समर्थकों को 80 मिनट तक संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर में एक नया राजनीतिक संगठन बनाने का इशारा किया। इस रैली में उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर तीखा हमला किया।


चुनावी वादों का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और मुफ्त बिजली देने के वादे केवल झूठ थे। उन्होंने अपने इस्तीफे को 'आजादी का फरमान' बताया।


इस्तीफे का महत्व

रुहुल्ला ने अपना इस्तीफा मोहम्मद अशरफ मट्टू को सौंपा, जो 2010 में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए किशोर तुफैल मट्टू के पिता हैं। उन्होंने मट्टू से कहा कि वह इस्तीफे को फारूक अब्दुल्ला तक पहुंचा दें।


नेशनल कॉन्फ्रेंस पर आरोप

रुहुल्ला ने उमर अब्दुल्ला को एक अक्षम नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने लोगों से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले, वे वोट के लिए गिड़गिड़ा रहे थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया।


भविष्य की योजनाएं

रुहुल्ला ने कहा कि कुछ लोग चाहते थे कि वह एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएं, लेकिन उनकी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा और सम्मान को बहाल करने के लिए एक आंदोलन शुरू करना है। उन्होंने 2024 के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन करने की अपील को एक गलती बताया।