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संजय निषाद का बयान: निषाद समाज को सावधान रहने की सलाह

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने निषाद समाज को चुनावी नेताओं से सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने अपने बयान में ऐसे नेताओं को 'बरसाती मेंढक' कहा, जो चुनाव के समय सक्रिय होते हैं। संजय ने फूलन देवी की हत्या का मुद्दा भी उठाया, जिससे राजनीतिक चर्चाएँ और भी गर्म हो गई हैं। जानें इस बयान का समाजवादी पार्टी पर क्या असर होगा और 2027 के चुनावों में निषाद समाज की भूमिका क्या होगी।
 

संजय निषाद का राजनीतिक बयान


Sanjay Nishad: उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावों की नजदीकी के चलते, कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने निषाद समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसने राजनीतिक चर्चाओं को फिर से गर्म कर दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की और चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा।


संजय निषाद ने ऐसे नेताओं को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘बहरूपिया’ करार देते हुए निषाद और मछुआरा समुदाय को सतर्क रहने की सलाह दी। उनका कहना है कि जो लोग साढ़े चार साल तक समाज के सुख-दुख में शामिल नहीं रहे, वही चुनाव के समय में अचानक सक्रिय हो जाते हैं।


— Dr. Sanjay Kumar Nishad (@drsanjayknishad) September 18, 2026



सवाल यह है कि संजय निषाद का इशारा किस ओर है? उन्होंने अपने पोस्ट में किसी विशेष पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणियों को समाजवादी पार्टी पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।


वास्तव में, समाजवादी पार्टी भी निषाद समाज में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इस वर्ष, सपा ने फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को अपनी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था।



संजय निषाद ने अपने पोस्ट में फूलन देवी की हत्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने फूलन देवी की हत्या कर मछुआरा समाज की राजनीतिक पहचान को उभरने से रोका। इस विषय पर पहले भी राजनीतिक विवाद उठ चुके हैं।


फूलन देवी की हत्या 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके आवास के बाहर गोली मारकर की गई थी। इस मामले में शेर सिंह राणा को दोषी ठहराया गया था। संजय निषाद पहले भी इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर चुके हैं।


इस प्रकार, 2027 के चुनावों से पहले निषाद समाज को लेकर समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी की राजनीतिक गतिविधियाँ स्पष्ट रूप से सामने आ रही हैं। अब देखना यह है कि संजय निषाद के इस बयान पर समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया क्या होती है और यूपी की राजनीति में निषाद वोट को लेकर यह टकराव कितना आगे बढ़ता है।