संजय राउत ने शिवसेना सांसदों को दिया कड़ा संदेश, इस्तीफे की चेतावनी
शिवसेना में संभावित फूट पर संजय राउत का सख्त बयान
नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) में संभावित विभाजन की चर्चाओं के बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अपने सांसदों को एक स्पष्ट और सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी नेता किसी अन्य राजनीतिक दल में जाने का विचार कर रहा है, उसे पहले अपने सांसद पद से इस्तीफा देना चाहिए।
राउत ने यह भी कहा कि पार्टी के चुनाव चिह्न और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में जीत हासिल करने वाले जनप्रतिनिधियों पर कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का विश्वास है। ऐसे में यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ने का निर्णय लेता है, तो नैतिकता के आधार पर उसे अपने पद से भी त्यागपत्र देना चाहिए।
सांसदों को प्रलोभन देने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना के नौ लोकसभा सांसदों में से अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे। इस दौरान पार्टी नेतृत्व ने संगठन की एकता का संदेश देने का प्रयास किया। संजय राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को दूसरी ओर जाने के लिए आर्थिक और राजनीतिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी को मिली जानकारी के अनुसार, कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी धनराशि की पेशकश की गई है। राउत ने यह भी कहा कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये देने का प्रस्ताव दिया गया है। उनका यह भी कहना है कि नेताओं की आवाजाही के लिए विशेष उड़ानों की व्यवस्था की गई है। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति या दल का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत दिया कि इन प्रयासों के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं।
उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठा की पुष्टि
राउत ने बताया कि 14 जून को पार्टी सांसदों की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में कुछ सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए, जबकि अन्य ने ऑनलाइन भाग लिया। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान सभी सांसदों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में अपनी आस्था और भरोसा व्यक्त किया। कुछ नेताओं ने धार्मिक और पारिवारिक मूल्यों का हवाला देते हुए पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
राउत ने कहा कि मुझे अब भी विश्वास है कि हमारे सभी सांसद हमारे साथ हैं। हमें उन पर भरोसा है, लेकिन पार्टी और कार्यकर्ताओं के विश्वास के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह भी बताया गया कि शिवसेना (यूबीटी) ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को लिखित रूप में भेजी है। राउत ने कहा कि पार्टी की पहचान और अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है और संगठन अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है।