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संजय सिंह का चुनाव आयोग पर हमला: लोकतंत्र को खतरा

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर केंद्र सरकार को कठोर आलोचना का निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र गंभीर संकट में है और चुनाव आयोग के भीतर असहमति के बावजूद एकतरफा निर्णय लिए जा रहे हैं। संजय सिंह ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की और कहा कि कई प्रमुख व्यक्तियों के नामों की कटौती से यह स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित लूट है। उन्होंने दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी गंभीर बताया और भाजपा-जदयू पर नाकामियों का आरोप लगाया।
 

लखनऊ में संजय सिंह का बयान

लखनऊ: आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और फॉर्म-6 में किए गए अवैध परिवर्तनों पर केंद्र की मोदी सरकार को कठोर आलोचना का निशाना बनाया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि देश में लोकतंत्र गंभीर संकट में है। चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार असहमति जताते हुए फॉर्म-6 में बदलाव और वोटों की गणना की केंद्रीकृत प्रणाली को गैर-कानूनी करार दिया, फिर भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए एकतरफा निर्णय लिए हैं।


ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले

संजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लागू किए गए वोटों को जोड़ने और हटाने के नए केंद्रीकृत तरीके पर दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार लिखित विरोध दर्ज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया गलत है और स्थानीय अधिकारियों से अधिकार छीनकर मनमाने ढंग से नाम हटाना पूरी तरह असंवैधानिक है। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब आयोग के भीतर ही दो आयुक्त इसे गलत मानते हैं, तो ज्ञानेश कुमार किसके इशारे पर यह कर रहे हैं? आज किसी भी विधानसभा में 50,000 वोट काट दिए जाते हैं, और भाजपा 5,000 वोटों से जीत का जश्न मनाती है। यह चुनाव नहीं, बल्कि मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार की मिलीभगत से हो रही वोटों की लूट है।


प्रमुख व्यक्तियों के नामों की कटौती

संजय सिंह ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता नहीं, बल्कि उनकी 'लूटप्रियता' है जिसके बल पर चुनाव जीते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 के नियमों को जानबूझकर जटिल बनाया गया है ताकि आम नागरिक इसे पूरा न कर सके। बंगाल में 60 लाख नाम काट दिए गए, और 27 लाख नाम पेंडिंग रखे गए, जबकि बाद में हलफनामा देकर कहा गया कि 93 फीसदी नाम सही थे। उन्होंने पूछा कि जिन लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित किया गया, उनके लिए जिम्मेदार कौन होगा? उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व सेना प्रमुख, और कई अन्य प्रमुख व्यक्तियों के नाम भी काट दिए गए हैं।


निष्पक्ष चुनाव की मांग

संजय सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आंखें मूंदे हुए है। जब 93 फीसदी वोटर्स सही पाए गए थे, तो उन्हें वोट देने से क्यों रोका गया? उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और सभी चुनाव रद्द किए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बिहार, बंगाल, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों को भी रद्द कर निष्पक्ष मतदाता सूची के साथ दोबारा चुनाव कराए जाएं।


दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति

दिल्ली के कालकाजी में गैंगरेप की घटना पर संजय सिंह ने कहा कि 2014 से भाजपा के सत्ता में आने के बाद दिल्ली को 'अपराध राजधानी' बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्रालय के अधीन है, लेकिन यहां छात्राएं और आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं। गैंगरेप, हत्या और गैंगवार की घटनाएं आम हो गई हैं।


बिहार में छेड़छाड़ की घटना

बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की घटना पर संजय सिंह ने कहा कि बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 25 साल से सत्ता में बैठी भाजपा-जदयू आज भी अपनी नाकामियों के लिए आरजेडी का नाम लेकर रोती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी लोकतंत्र की इस लूट और भाजपा के कुशासन के खिलाफ मजबूती से संघर्ष जारी रखेगी।