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संयुक्त अरब अमीरात में बढ़ते तनाव के बीच मिसाइल हमले

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) हाल ही में मिसाइल हमलों के कारण गंभीर संकट में है, जिसने क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। अबू धाबी में हुए धमाकों ने न केवल स्थानीय निवासियों को भयभीत किया, बल्कि एयरस्पेस बंद होने और व्यापार में रुकावट के कारण आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम खाड़ी देशों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

मिडिल ईस्ट का कमर्शियल अड्डा युद्ध की चपेट में आया

संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जो मिडिल ईस्ट का एक प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक केंद्र माना जाता है, अब क्षेत्रीय संघर्ष के कारण संकट में है। हाल ही में हुए मिसाइल हमलों ने अबू धाबी सहित कई क्षेत्रों में आतंक का माहौल पैदा कर दिया है। धमाकों और आसमान में चमकती रोशनी ने स्थानीय निवासियों को चौंका दिया, जबकि एयरस्पेस बंद होने से उड़ानों में रुकावट आई और व्यापार प्रभावित हुआ। UAE को पहले एक सुरक्षित और स्थिर आर्थिक हब माना जाता था, लेकिन इन घटनाओं ने उसकी छवि को धक्का पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव का असर अब खाड़ी देशों पर भी पड़ रहा है।


अल धाफरा एयर बेस

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने हमलों में ओमानी क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थलों को निशाना बनाया, जो अमेरिकी सेना के साथ लॉजिस्टिक संबंध बनाए रखते हैं। आने वाले प्रोजेक्टाइल ने थुमरैत एयर बेस और दुकम पोर्ट के आसपास के क्षेत्रों को टारगेट किया। हालांकि ओमान सीधे तौर पर लड़ाई में शामिल नहीं है, लेकिन ये सुविधाएं अरब सागर और हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण हैं।


राजधानी में धमाके

ये हमले केवल दूर की सैन्य मुठभेड़ें नहीं थे; इनका सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ा। गवाहों ने बताया कि अबू धाबी के आसमान में कई जोरदार धमाके और तेज रोशनी देखी गई। बैलिस्टिक मिसाइलों के झटके इतने जोरदार थे कि कॉर्निश के पास के रिहायशी इलाकों की खिड़कियाँ हिल गईं, जिससे स्थानीय लोगों में घबराहट फैल गई।


IRGC की पक्की चेतावनी

UAE पर हमले के जरिए, ईरान अपने खाड़ी पड़ोसियों को स्पष्ट चेतावनी दे रहा है कि यदि कोई देश अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को होस्ट करता है, तो डिप्लोमैटिक रिश्ते और आर्थिक साझेदारी सुरक्षा नहीं दे सकती। IRGC की कार्रवाई अमेरिका के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति को दर्शाती है, जो UAE को सजा देने का एक तरीका है।


एविएशन और आर्थिक रुकावट

इस हमले ने UAE के एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में तुरंत संकट उत्पन्न कर दिया। ईरानी मिसाइलों के खतरे के कारण एयरस्पेस बंद करना पड़ा और उड़ानों में भारी रुकावटें आईं। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपने रूट बदलने पड़े, जिससे UAE का एक प्रमुख वैश्विक ट्रांज़िट हब के रूप में दर्जा खतरे में पड़ गया।


गल्फ डिप्लोमेसी का खत्म होना

मिसाइल हमले UAE और तेहरान के बीच सामान्य और स्थिर संबंधों की हालिया डिप्लोमैटिक कोशिशों की विफलता को दर्शाते हैं। अबू धाबी ने वर्षों से ईरान के साथ आर्थिक और डिप्लोमैटिक संबंधों को संतुलित किया है, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है।


बिना बॉर्डर वाला इलाकाई झगड़ा

UAE पर बमबारी इस सच्चाई को और स्पष्ट करती है कि US-इज़राइली हमलों ने एक बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत की है। ईरान बहरीन से लेकर कतर और UAE तक अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, जिससे यह संघर्ष अब ईरानी और इज़राइली एयरस्पेस तक सीमित नहीं रह सकता।