संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इजरायल और रूस का नाम पहली बार शामिल
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट से हड़कंप
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा जारी की गई एक नई और महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इस वार्षिक रिपोर्ट में, जो संघर्ष क्षेत्रों में यौन हिंसा से संबंधित है, पहली बार इजरायल और रूस के सशस्त्र बलों को काली सूची में डाला गया है। यह रिपोर्ट लगभग 35 पन्नों की है और इसे शुक्रवार को आधिकारिक रूप से जारी किया जाना था, लेकिन इसका विवरण गुरुवार रात को ही मीडिया में लीक हो गया।
इस रिपोर्ट में दुनिया के 12 विभिन्न देशों के 77 सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, जिसमें सैन्य और उग्रवादी समूह शामिल हैं, को चिन्हित किया गया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने युद्ध और आंतरिक संघर्षों के दौरान यौन हिंसा को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया या इसके प्रति लापरवाह रहे। संयुक्त राष्ट्र के निष्कर्षों के अनुसार, वर्ष 2025 में युद्धग्रस्त क्षेत्रों में यौन हिंसा की घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक वृद्धि हुई है, जो वैश्विक सुरक्षा और मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है.
रूस और इजरायल पर गंभीर आरोप
रूस के सशस्त्र बलों को भी पहली बार इस सूची में शामिल किया गया है। उन पर यूक्रेन युद्ध के दौरान युद्धबंदियों और असैन्य नागरिकों के साथ यौन हिंसा करने के आरोप लगाए गए हैं। 2025 की सूची में इजराइल की सेना और सुरक्षा बलों के साथ-साथ हमास के लड़ाकों का नाम भी शामिल है। हमास को पहले ही 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद काली सूची में डाला जा चुका था।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने पिछले वर्ष रूस और इजराइल को चेतावनी दी थी कि उन्हें इस सूची में डाला जा सकता है। इजराइल और रूस के राजदूतों ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और गुतारेस की आलोचना की। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में संयुक्त राष्ट्र ने इजराइल और फलस्तीन के कब्जे वाले क्षेत्रों में बंद फलस्तीनियों के खिलाफ यौन हिंसा के कई मामले दर्ज किए हैं, जिसमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, जबरन नग्नता और बलात्कार की धमकियों जैसे मामले शामिल हैं। इजराइल के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है.
हमास पर भी यौन हिंसा के आरोप
रिपोर्ट में हमास पर यौन हिंसा के आरोपों को भी दोहराया गया है, हालांकि जांच के लिए पर्याप्त पहुंच न मिलने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस और रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में संघर्ष से जुड़े यौन हिंसा के 310 मामले सत्यापित किए गए हैं। वहीं, यूक्रेन में भी 31 मामलों का दस्तावेजीकरण हुआ है, लेकिन उसे संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में शामिल नहीं किया गया है.