संयुक्त राष्ट्र महासभा में बहुपक्षवाद में सुधार की आवश्यकता पर जोर
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एस. जयशंकर का बयान
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 26 सितंबर - विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व नेताओं से कहा कि बहुपक्षवाद में सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि वैश्विक संस्थानों की शांति बनाए रखने में असमर्थता प्रगति के लिए खतरा बन रही है और विकास की गति को धीमा कर रही है। उन्होंने महासभा के 81वें उच्चस्तरीय सत्र की आम चर्चा में कहा, "हम तेजी से बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं। 1945 के बाद की व्यवस्था अब नई वास्तविकताओं के अनुरूप बदल रही है।"
इस बदलाव के साथ सामंजस्य स्थापित करना और इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। आज जो उथल-पुथल हम देख रहे हैं, उसका कारण इन्हीं कठिनाइयों में निहित है। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से विविधतापूर्ण दुनिया का अधिक लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ना रोका नहीं जा सकता। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बहुलतावादी व्यवस्था में शांति के लिए संवाद की आवश्यकता होती है; व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श जरूरी है; पारदर्शी तरीके से निर्णय लेने चाहिए।"
उन्होंने यह भी कहा कि मानवता के बड़े हिस्से को इस प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। बहुपक्षवाद में सुधार की आवश्यकता का पक्ष दिन-ब-दिन और मजबूत होता जा रहा है। जयशंकर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा इसके लिए प्रभावी सामूहिक कार्रवाई करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
हालांकि, उन्होंने चिंता जताई कि जब हम यहां बैठक कर रहे हैं, तब भी संघर्ष और टकराव हमारी सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं। शांति बनाए रखने में असमर्थता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा उत्पन्न कर रही है और विकास की गति को भी धीमा कर रही है।
उन्होंने कहा, "वैश्वीकृत दुनिया में युद्ध के प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किए जाते हैं। संघर्ष से दूर स्थित देशों को भी बिना किसी गलती के इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। जो लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है।"
इस महासभा को वास्तविक स्थिति का सामना करना चाहिए।