संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया पर भारत की चिंता
सुरक्षा परिषद में सुधार की वार्ता
भारत के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में बताया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अब तक 17 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को कुछ देशों के विभाजनकारी हितों के कारण बाधित नहीं होने दिया जाना चाहिए। मंगलवार को, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से संबंधित अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को अपने अगले सत्र तक जारी रखने का निर्णय लिया।
महासभा की वार्षिक प्रक्रिया
यह महासभा की वार्षिक प्रक्रिया है, जो बिना किसी ठोस परिणाम के अब 18वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए वार्ता अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में होगी, जो सितंबर में शुरू होगा।
भारत का समर्थन और आलोचना
भारत ने सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और सदस्य संख्या में वृद्धि के प्रश्न पर अंतर-सरकारी वार्ता को 81वें सत्र तक जारी रखने के मौखिक मसौदा निर्णय का समर्थन किया। हालांकि, उसने ठोस परिणामों की कमी और कुछ देशों द्वारा प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की। राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि पिछले सत्रों की तरह, 80वां सत्र भी किसी परिणाम पर सहमति बनाने में असफल रहा।
अंतर-सरकारी वार्ता की निराशा
उन्होंने कहा, "अंतर-सरकारी वार्ता अब तक 17 चक्रों से गुजर चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। दुनिया को और कितने समय तक इंतजार करना होगा?" भारत ने सुधार प्रक्रिया की धीमी गति की आलोचना करते हुए कहा कि सदस्य देश हर सत्र में अपने पुराने रुख को दोहराते रहते हैं, जिससे असल दुनिया में सुधार की उम्मीद कमजोर होती जा रही है।
सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता
सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है। इसे कुछ चुनिंदा देशों के संकीर्ण हितों के कारण बाधित नहीं होने दिया जाना चाहिए। हरीश ने कहा कि सुधार हासिल करने का रास्ता स्पष्ट है, जिसमें निर्धारित समयसीमा और लक्ष्यों के साथ लिखित मसौदे पर आधारित वार्ता शामिल होनी चाहिए।
ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व
भारत ने कहा कि इस तरह के प्रयास का परिणाम सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार के रूप में सामने आना चाहिए, जिसमें 'ग्लोबल साउथ' को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हरीश ने कहा, "भारत इस प्रयास में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमें उम्मीद है कि अंतर-सरकारी वार्ता का 81वां सत्र इस दिशा में एक नई शुरुआत करेगा।"
भारत की सुरक्षा परिषद की उम्मीदवारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत की उम्मीदवारी का आधिकारिक प्रचार अभियान शुरू किया।