संसद का मानसून सत्र: अमित शाह की अनुपस्थिति पर विपक्ष का हंगामा
संसद में हंगामा और अमित शाह की अनुपस्थिति
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र अपने समापन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब तक किसी भी सदन की कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमला कर रहे हैं। सोमवार को, मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं ने संसद परिसर में प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन किया, जिसमें 21 जुलाई से अब तक की तारीखें और अमित शाह के नाम के आगे 'एब्सेंट' लिखा था।
लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को उठाया। सरकार ने कहा कि अमित शाह संसद में जवाब देंगे, लेकिन विपक्ष को उनकी बात सुनने के लिए बिना हंगामा किए बैठना होगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि शाह विस्तार से जवाब देंगे, लेकिन विपक्ष को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बहस से भागेंगे नहीं। हालांकि, रिजिजू ने यह नहीं बताया कि शाह कब बोलेंगे।
इस बीच, जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'जंतर मंतर पर कोई गोली नहीं चली। राहुल गांधी भ्रम फैला रहे हैं। गृह मंत्री हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन आप चर्चा से मत भागिए।' सोमवार को लोकसभा में चार महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए, जिनमें ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 और माइंस एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026 शामिल हैं। इसके अलावा, केरल का नाम 'केरलम' करने का बिल भी पेश किया गया। लोकसभा ने ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया और इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी गई।
संसद ने सोमवार को टैक्सेशन और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि इस कानून में यूपीआई पर कोई टैक्स या ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं लगाया गया है। लोकसभा से पिछले सप्ताह पारित विधेयक को राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री के जवाब के बाद ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। इससे पहले, सोमवार की सुबह कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में जारी गतिरोध पर चिंता जताई और नेताओं से अपील की कि जनता की आवाज सदन में सुनी जानी चाहिए।