संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत: हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के बीच
संसद का पहला दिन: राजनीतिक टकराव
नई दिल्ली: संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शनों के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और राम मंदिर चंदे से संबंधित आरोपों पर चर्चा की मांग करते हुए जोरदार हंगामा किया। इस बीच, संसद मार्ग पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा रखा गया और संसद परिसर के आसपास पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई।
प्रधानमंत्री की सार्थक चर्चा की अपील
सत्र के आरंभ से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से सार्थक चर्चा की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि बहस तथ्यों और तर्कों पर आधारित होगी, तो हंगामे की कोई आवश्यकता नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने संसद के मॉनसून सत्र को देशहित में सकारात्मक और उपयोगी रहने की उम्मीद जताई।
विपक्ष का हंगामा और कार्यवाही में रुकावट
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों पर चर्चा की मांग की। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
संसद के बाहर प्रदर्शन जारी
संसद मार्ग के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की और कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हुई।
राजनीतिक दलों का समर्थन
प्रदर्शन के दौरान कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने डिंपल यादव के नेतृत्व में मार्च निकाला। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताते हुए सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
शाम तक स्थिति सामान्य
दिल्ली पुलिस के अनुसार, शाम तक संसद परिसर और आसपास के क्षेत्रों से भीड़ हटा दी गई और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में रही। सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों के बीच संसद के सभी प्रवेश द्वार फिर से खोल दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रहेगी और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात रहेगा।