संसद में नीट पेपर लीक पर गरमाई बहस, विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
संसद में नीट पेपर लीक पर गरमागरमी
बुधवार को संसद में नीट पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर माहौल काफी गर्म रहा। विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के चलते सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने का निर्णय लिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि छात्रों का हित सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए इस विषय पर खुली बहस की आवश्यकता है।
विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सरकार द्वारा चर्चा की सहमति मिलने के बावजूद विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा। विपक्षी दलों ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरते हुए प्रधानमंत्री से सदन में बयान देने की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद के बाहर युवाओं के मुद्दों पर बोलते हैं, लेकिन सदन में इस पर जवाब देने से बचते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने सख्ती बरती और सरकार को इसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए।
इस्तीफे की मांग पर अडिग विपक्ष
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि जवाबदेही के बिना बहस का कोई अर्थ नहीं है और शिक्षा मंत्री को पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दोनों पक्षों के बीच चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के अडिग रुख के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
प्रधानमंत्री की पहली प्रतिक्रिया
इस विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक एक गंभीर अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र सरकार से मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि यह किसी दल की राजनीति का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर छात्रों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की।