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संसद में परीक्षा सुधार विधेयक पर गरमागरम बहस, गौरव गोगई ने धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना

संसद के मॉनसून सत्र में परीक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगई ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रहते हुए 21 बच्चों ने आत्महत्या की और मोदी सरकार की विफलता को उजागर किया। गोगई ने यह भी कहा कि NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में 44 आरोपियों को जमानत मिल गई है, जो शर्मनाक है। इस बहस में गोगई ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और युवाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष की बात की। जानें इस बहस के और भी महत्वपूर्ण पहलू।
 

संसद सत्र की गरमी


संसद सत्र: संसद के मॉनसून सत्र के सातवें दिन लोकसभा में परीक्षा सुधार से संबंधित विधेयक पर चर्चा आरंभ हो गई है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगई ने धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री रहते हुए धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में 21 बच्चों ने आत्महत्या की। जब वे इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में पहुंचे, तो भाजपा सांसदों ने उनका स्वागत ऐसे किया जैसे वे पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों।


गौरव गोगई ने आगे कहा कि लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का अध्ययन करने से यह स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार शिक्षा प्रणाली में सुधार के प्रति गंभीर नहीं है। 2024 में भी इस बिल को ऐतिहासिक बताया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह कानून मोदी सरकार की विफलता का प्रतीक है। NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में जिन 45 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, उनमें से 44 को जमानत मिल चुकी है, जो बेहद शर्मनाक है।


उन्होंने कहा कि 2024 में पेपर लीक के समय भी धर्मेंद्र प्रधान सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे और 2026 में भी उनका यही रवैया था। यह शर्म की बात है कि जिस मंत्री के कार्यकाल में 21 बच्चों ने जान दी, मोदी सरकार उनका सम्मान करती है। परीक्षा सुधार और पेपर लीक माफिया के खिलाफ ठोस कदम उठाने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी इंस्टाग्राम पर ध्यान देने की बात करते हैं। आरएसएस ने देश के शिक्षा संस्थानों पर कब्जा कर लिया है।


गौरव गोगई ने कहा कि युवा अपने अधिकारों के लिए दिल्ली में एकत्र हुए थे। आंदोलन के दौरान कुछ को लाठी लगी, कुछ का सिर फटा, लेकिन वे डिगे नहीं। इस आंदोलन में हमने इंसानियत देखी, लेकिन दूसरी ओर युवाओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज भी हुआ। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक पुलिसकर्मी ने एक लड़की को थप्पड़ मारा और एक लड़की के प्राइवेट पार्ट में डंडा मारा। युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। हमें यह जानने का हक है कि किसने लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के गोले छोड़ने का आदेश दिया? सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को इस पर जवाब देना होगा।


एनटीए में 37 पद स्वीकृत लेकिन 47 लोगों पर कार्रवाई कैसे?
गौरव गोगई ने कहा कि सरकार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि वह इस मुद्दे पर गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एनटीए के 47 लोगों के बदले जाने की बात कही है, लेकिन वे जानना चाहते हैं कि ये 47 लोग कौन हैं। उन्होंने कहा कि एनटीए में स्वीकृत पदों की संख्या 34 है और इनमें से 10 से 12 पद खाली हैं, ऐसे में 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा कैसे किया जा रहा है।