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संसद सत्र से पहले विपक्षी दलों की बैठक में महिला आरक्षण पर चर्चा

नई दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रस्ताव का महिला आरक्षण से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने जाति जनगणना के आंकड़ों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने भी परिसीमन का विरोध किया। इस बैठक में कई नेताओं ने सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई और न्याय के सिद्धांतों की रक्षा की बात की।
 

विपक्षी दलों की बैठक में महिला आरक्षण का समर्थन

नई दिल्ली। संसद के तीन दिवसीय सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले, बुधवार को विपक्षी पार्टियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सभी नेताओं ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। राहुल गांधी ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करती है। संसद ने 2023 में इस बिल को सर्वसम्मति से पारित किया था, और यह अब हमारे संविधान का हिस्सा बन चुका है। सरकार द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव का महिला आरक्षण से कोई संबंध नहीं है। यह संशोधन, परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों में मनमाने बदलाव के माध्यम से सत्ता पर कब्जा करने का प्रयास है।'


राहुल ने जाति जनगणना के मुद्दे को भी उठाया और कहा, 'हम जाति जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज करके ओबीसी, दलित और आदिवासियों के हिस्से की चोरी नहीं होने देंगे। इसके साथ ही, हम दक्षिणी, उत्तर पूर्वी, उत्तर पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने देंगे।' तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने भी परिसीमन का विरोध किया। उसके नेता टीआर बालू ने कहा कि 2023 में पारित विधेयक को उसकी मूल भावना के अनुसार लागू किया जाना चाहिए। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा, 'हम परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह वास्तव में एक जाल है। वे 2023 में भी आरक्षण दे सकते थे, और हम अब भी उसका समर्थन करते हैं। लेकिन हमने परिसीमन का पूरी ताकत से विरोध करने का निर्णय लिया है, क्योंकि यह न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।'