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संसदीय समितियों की शक्ति में कमी पर चिंता बढ़ी

संसदीय समितियों की प्रभावशीलता में कमी को लेकर चिंता बढ़ रही है, खासकर शिक्षा मंत्रालय की समिति के संदर्भ में। हाल ही में, समिति ने सीबीएसई की 12वीं परीक्षा में गड़बड़ियों और नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक की जांच शुरू की है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह को अपने तरीके से कार्य करने से रोका है। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी और इसके पीछे के कारण।
 

संसदीय समितियों की स्थिति


पिछले कुछ वर्षों से यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि संसदीय समितियों की प्रभावशीलता धीरे-धीरे कम हो रही है। हाल ही में शिक्षा क्षेत्र में हुई गड़बड़ियों के संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति के कार्यों में यह स्पष्ट हुआ है। जानकारी मिली है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसद बहुमत का लाभ उठाकर समिति की प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह, को अपने तरीके से कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे पहले भी कई समितियों में ऐसा देखा गया है कि विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष होने के बावजूद सत्तापक्ष के सांसदों ने निर्णय लेने में बाधा डाली है।


शिक्षा मामलों की समिति की जांच

शिक्षा मामलों की संसदीय समिति वर्तमान में दो महत्वपूर्ण मामलों की जांच कर रही है। पहला मामला सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ियों का है, और दूसरा नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक का है। सीबीएसई के मामले में यह पहली बार हुआ है कि 12वीं के परीक्षा देने वाले छात्रों को प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया गया। वहीं, नीट यूजी के पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले डॉक्टरों के संगठन, यूनाइटेड फोरम ऑफ डॉक्टर्स, को समिति के समक्ष पेश नहीं होने दिया गया। समिति के अध्यक्ष ने डॉक्टरों के संगठन के प्रतिनिधि को बुलाने और उनकी बात सुनने की इच्छा जताई, लेकिन भाजपा और उसके सहयोगी दलों के सांसदों ने इसे रोक दिया।