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सऊदी अरब और UAE का ईरान के खिलाफ नया सैन्य रुख

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और UAE ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। हाल के मिसाइल हमलों और ईरान के बढ़ते प्रभाव ने इन देशों को सक्रिय रूप से संघर्ष में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। जानें कि कैसे ये देश अब सैन्य और आर्थिक दबाव के माध्यम से ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करने की योजना बना रहे हैं।
 

पश्चिम एशिया में बदलते समीकरण

पश्चिम एशिया के रणनीतिक परिदृश्य में तेजी से बदलाव आ रहा है। कुछ हफ्तों की अनिश्चितता के बाद, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब ईरान के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल होने की योजना बना रहे हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के बढ़ते प्रभाव और खाड़ी देशों में हुए मिसाइल हमलों ने इन देशों को अपनी नीति को सख्त करने के लिए मजबूर कर दिया है।


रणनीतिक बदलाव के कारण

खाड़ी देशों ने पहले 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (अमेरिका) और 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' (इज़रायल) से दूरी बनाई थी, लेकिन हाल की घटनाओं ने उनकी सोच में बदलाव ला दिया है।


ईरान समर्थित ड्रोन और मिसाइल हमलों ने कतर के 'रास लफ़ान' गैस हब और अन्य तेल केंद्रों पर हमला किया है, जिससे खाड़ी की अर्थव्यवस्था को सीधा नुकसान हुआ है।


ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने और जहाजों पर 'ट्रांजिट फीस' लगाने के प्रस्ताव ने खाड़ी देशों में चिंता बढ़ा दी है।


खाड़ी नेताओं का मानना है कि अब चुप रहने की कीमत युद्ध में शामिल होने के जोखिम से कहीं अधिक हो गई है।


सऊदी और UAE की नई रणनीति

खाड़ी देश अब दो मोर्चों पर काम कर रहे हैं।


सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को 'किंग फहद एयर बेस' तक पहुंच प्रदान करने पर सहमति दी है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव है।


UAE अपने वित्तीय प्रणाली में ईरान के अरबों डॉलर के एसेट्स को फ्रीज़ करने पर विचार कर रहा है, जिससे तेहरान को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।


खाड़ी देशों का लक्ष्य

खाड़ी के राजनयिकों ने अमेरिका पर जोर दिया है कि युद्ध केवल 'सीज़फ़ायर' पर खत्म नहीं होना चाहिए।


उनका मानना है कि यदि ईरान के पास वर्तमान हथियार और मिसाइल क्षमताएं बची रहीं, तो यह उनके लिए एक "रणनीतिक तबाही" होगी।


ईरान की आक्रामकता का प्रभाव

जब अमेरिका और इज़रायल ने क्रमशः 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' शुरू किए, तो खाड़ी देशों ने संदेह जताया था कि ये हमले ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर रोक लगा पाएंगे।


हालांकि, ईरान की आक्रामकता ने इस सोच को बदल दिया है।


खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे और शहरों पर हुए हमलों ने सरकारों को हिलाकर रख दिया है।


दबाव बढ़ाना

सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को 'किंग फहद एयर बेस' तक पहुंच प्रदान करने पर सहमति जताई है।


UAE अपने वित्तीय प्रणाली में ईरान के अरबों डॉलर के एसेट्स को फ्रीज़ करने पर विचार कर रहा है।


खाड़ी के नेता अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं, लेकिन पेंटागन की रणनीति पर उनका प्रभाव सीमित रहा है।