☰
×

सऊदी अरब और अंसारुल्लाह के बीच संघर्ष: एक जटिल स्थिति

यमन में अंसारुल्लाह हूती द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ चलाए जा रहे प्रतिरोध ने स्थिति को जटिल बना दिया है। सऊदी अरब की रॉयल एयरफोर्स, जो अत्याधुनिक फाइटर जेट्स से लैस है, फिर भी हूतियों पर काबू पाने में असफल रही है। जानें कैसे सऊदी अरब की वायुसेना को अंसारुल्लाह के अंडरग्राउंड ढांचे और रणनीतियों का सामना करना पड़ रहा है।
 

यमन में सऊदी अरब की चुनौतियाँ

यमन में अंसारुल्लाह हूती द्वारा किए जा रहे प्रतिरोध ने सऊदी अरब के लिए गंभीर समस्याएँ खड़ी कर दी हैं। मध्य पूर्व में सऊदी अरब की स्थिति ऐसी हो गई है जैसे किसी ने अपनी सारी ऊर्जा और समय सुरक्षा के उपायों में लगा दिए हों, लेकिन अब जब संकट आया है, तो ये उपाय विफल हो गए हैं। सऊदी अरब अब इस्लामाबाद, अंकारा, वाशिंगटन और लंदन में विशेषज्ञों से बेहतर समाधान की तलाश कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि आखिर सऊदी अरब पिछले तीन महीनों में हूतियों पर काबू क्यों नहीं पा सका।


सऊदी रॉयल एयरफोर्स एक शक्तिशाली बल है, जिसे हराना आसान नहीं है। अमेरिका ने वर्षों से सऊदी अरब को अत्याधुनिक फाइटर जेट और रक्षा प्रणाली प्रदान की है। सऊदी अरब के पास F-15 एस और एफ-15 ईगल का उन्नत संस्करण है, जो दुनिया में दूसरे सबसे बड़े F-15 बेड़े का निर्माण करता है। इसके पास एपीजी 63 सक्रिय इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन रडार और डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल जैसी सुविधाएँ भी हैं।


सऊदी एयरफोर्स की रणनीति और चुनौतियाँ

F-15 के बेड़े के साथ, सऊदी अरब की रॉयल एयरफोर्स में यूरोफाइटर, टाइफून, टॉर्नेडो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक युद्धक जहाज शामिल हैं। हालांकि, यमन में अंसारुल्लाह के नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर सऊदी एयरफोर्स के हमले के बावजूद, आरोप है कि ये हमले नागरिक क्षेत्रों पर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब सऊदी एयरफोर्स अंसारुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी कर रही है, तो धुएं और धूल के गुबार से ऐसा लगता है कि भारी तबाही हुई है, लेकिन असलियत यह है कि ये केवल पहाड़ों की ऊपरी सतह पर बमबारी है।


अंसारुल्लाह ने वर्षों से अपने अंडरग्राउंड ढांचे को विकसित किया है, जिसमें सुरंगें और सुरक्षित स्थान शामिल हैं। सऊदी वायुसेना इन सुरंगों के प्रवेश बिंदुओं पर बमबारी कर रही है, लेकिन अंसारुल्लाह के इंजीनियर्स जल्दी ही नुकसान की भरपाई कर लेते हैं। जब अंसारुल्लाह ने 2014-15 में यमन में सरकार बनाई, तो उन्होंने अपने रक्षा ढांचे को विरासत में लिया, जिसमें सैन्य अड्डे और गोला-बारूद के डिपो शामिल थे।