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सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ता संघर्ष: तेल प्रतिष्ठानों पर हमले

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष ने गंभीर मोड़ ले लिया है। हाल ही में, सऊदी अरामको के परिसर पर मिसाइल हमले के बाद स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यमन में हवाई हमले तेज कर दिए हैं। इस संघर्ष का प्रभाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर हो सकता है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती हिंसा

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष अब एक गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। मिसाइलों और ड्रोन से हमले हो रहे हैं, जबकि तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकियां दी जा रही हैं। इसके जवाब में, यमन पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की बमबारी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। हाल ही में, सऊदी अरब के धहरान शहर में सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर पर मिसाइल हमले के बाद आग लग गई। सऊदी गठबंधन ने यमन की राजधानी सना और पश्चिमी हुदैदा प्रांत में हूतियों के ठिकानों पर भी हमले किए हैं।


अरामको परिसर पर मिसाइल हमला

मंगलवार रात को सऊदी अरब के धहरान में अरामको के प्रशासनिक भवन पर एक मिसाइल हमला हुआ। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया और इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइल ने परिसर के एक कार्यालय टावर की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचाया। यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अरामको का यह परिसर कंपनी के प्रमुख परिचालन केंद्रों में से एक है।


रियाद में मिसाइलों का खतरा

सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई मिसाइलों और ड्रोन को नष्ट कर दिया है। हालांकि, रियाद में दो हूती मिसाइलों को रोकने के बाद मलबे के गिरने से चार लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। इससे पहले, रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों में 13 लोगों की मौत हो गई थी।


सऊदी गठबंधन की जवाबी कार्रवाई

हूतियों के हमलों के बीच, सऊदी अरब ने अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। हाल ही में, सना और हुदैदा प्रांत में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों की खबरें आई हैं। गठबंधन का कहना है कि उनका उद्देश्य हूतियों की क्षमताओं को निष्प्रभावी करना है, जो सऊदी अरब और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को खतरे में डाल रहे हैं।


बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर स्थिति

इस संघर्ष का एक महत्वपूर्ण मोर्चा लाल सागर से जुड़ा समुद्री क्षेत्र है। हूतियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। यहां अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव पड़ सकता है।


युद्ध की आशंकाएं और ईरान की भूमिका

यमन में संघर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। सऊदी अरब ने 2015 में यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। ईरान की भूमिका भी इस संघर्ष में महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह हूतियों का समर्थन करता है।


संघर्ष का भविष्य

सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह संघर्ष अब केवल सीमावर्ती सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। यदि दोनों पक्षों ने हमलों का दायरा बढ़ाया, तो इसका असर सऊदी अरब और यमन के नागरिकों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा।