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सऊदी अरब की यमन में बमबारी और यूएई की सेना वापसी

सऊदी अरब ने यमन के मुकाला बंदरगाह पर बमबारी की, जिसका लक्ष्य यूएई से भेजे गए हथियारों की खेप थी। इस हमले के बाद, यूएई ने यमन से अपनी सेना वापस बुलाने का निर्णय लिया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस स्थिति पर यूएई और सऊदी अरब के नेताओं से बातचीत की। यमन में चल रहे संघर्ष के कारण गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

यमन पर सऊदी अरब का हमला

सऊदी अरब ने यमन के मुकाला बंदरगाह शहर पर बमबारी की, जिसका लक्ष्य संयुक्त अरब अमीरात से अलगाववादी ताकतों के लिए भेजे गए हथियारों की खेप थी। यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर हुई है, जिससे फारस की खाड़ी क्षेत्र में नए खतरों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद, संयुक्त अरब अमीरात ने यमन से अपनी सेना को वापस बुलाने का निर्णय लिया। यूएई द्वारा समर्थित अलगाववादी दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एसटीसी) ने हाल ही में हद्रामौत और महरा प्रांतों के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है।


मार्को रूबियो की बातचीत

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने यमन में बिगड़ती स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के नेताओं से फोन पर चर्चा की। अमेरिकी सरकार द्वारा जारी एक बयान में इस बातचीत की जानकारी दी गई। रूबियो ने पहले यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद से बात की, जिसमें यमन की मौजूदा स्थिति और मध्य पूर्व की सुरक्षा पर चर्चा की गई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब यमन की सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। इसके बाद, रूबियो ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी बात की। यमन में एक दशक से चल रहे संघर्ष के कारण गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के सबसे खराब संकटों में से एक माना है। अमेरिका का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग से मध्य पूर्व में स्थिरता लाना आवश्यक है।


यूएई की सेना की वापसी

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने यमन से अपनी सेना को वापस बुलाने और आतंकवाद विरोधी अभियान को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह कदम सऊदी अरब के उन आरोपों के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि यूएई यमन के अलगाववादी गुट 'सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल' (एसटीसी) को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। सऊदी अरब ने यमन के मुकाला बंदरगाह पर हमला किया था, जिसमें दावा किया गया था कि यूएई से आए जहाज में एसटीसी के लिए हथियार थे, जबकि यूएई ने इसे गलत बताते हुए कहा कि जहाज में केवल सैन्य गाड़िया थी।