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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की संभावनाएं बढ़ीं

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन की संभावनाएं बढ़ रही हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद, सपा ने महसूस किया है कि भाजपा को हराने के लिए उन्हें कांग्रेस के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है। दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे को संदेश भेजा है कि उन्हें एक साथ चुनाव लड़ना है। जानें कैसे ये दोनों पार्टियां मिलकर उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने की योजना बना रही हैं और सीटों के बंटवारे पर चर्चा कर रही हैं।
 

सपा और कांग्रेस के बीच संबंधों में सुधार की कोशिश


समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच जो तनाव दिखाई दे रहा था, उसे समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों के बाद, सपा ने यह महसूस किया है कि भाजपा को हराने के लिए उन्हें और अधिक सहयोग की आवश्यकता है। यह सहयोग कांग्रेस से प्राप्त किया जा सकता है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि भले ही लोकसभा में सपा ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती हों, लेकिन विधानसभा चुनाव में जीत की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तृणमूल कांग्रेस ने 29 सीटें जीती थीं, लेकिन विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें हराया।


सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे को संदेश भेजा है कि उन्हें एक साथ चुनाव लड़ना है। 8 जून को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की बैठक होगी, जिसमें राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया जाएगा। चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की स्थिति कमजोर हो गई है, और अगर उनकी पार्टी टूटती है, तो यह उनके लिए और भी मुश्किल होगी।


कांग्रेस 102 सीटों की सूची तैयार कर रही है, जिसमें सभी 403 सीटों पर कम से कम पांच नाम मांगे गए हैं। दूसरी ओर, सपा 75 से 80 सीटें कांग्रेस को देने की योजना बना रही है। अखिलेश यादव ने अपने सांसदों से कहा है कि वे अपने क्षेत्र की एक सीट का नाम बताएं जो कांग्रेस को दी जा सकती है। यह संकेत देता है कि सपा हर लोकसभा सीट पर औसतन एक सीट कांग्रेस को देने की योजना बना रही है।