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समाजवादी पार्टी में गुटबाजी: अखिलेश यादव की बैठक में हुआ विवाद

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के भीतर गुटबाजी का मामला सामने आया है। लखनऊ में आयोजित बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने दो वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें गाली-गलौज भी शामिल थी। इस अनुशासनहीनता से नाराज होकर अखिलेश यादव बैठक छोड़कर चले गए। इसके बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को भंग कर दिया। इस घटना ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर चुनावों के नजदीक आने पर।
 

लखनऊ में सपा नेताओं के बीच विवाद

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के भीतर नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आई है। लखनऊ में चुनावी रणनीति पर चर्चा करने के लिए आयोजित बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने ही दो वरिष्ठ नेता आपस में भिड़ गए। इस दौरान उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसमें गाली-गलौज भी शामिल थी। इस अनुशासनहीनता से नाराज होकर अखिलेश यादव बैठक छोड़कर बाहर चले गए। इसके बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को भंग करने का बड़ा निर्णय लिया।


चुनावी समीक्षा के दौरान हुई बहस

बैठक में एटा और कासगंज के लगभग 25 पदाधिकारियों ने भाग लिया। दोपहर करीब 12 बजे जब अखिलेश यादव बैठक में पहुंचे, तो मंजीत यादव ने पिछले चुनावों में पार्टी की हार के कारणों पर चर्चा शुरू की। इस पर एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जोगेंद्र सिंह यादव ने दखल दिया, जिससे दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई। यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों नेता एक-दूसरे को अपशब्द कहने लगे।


अखिलेश यादव की नाराजगी और पार्टी की कार्रवाई

अखिलेश यादव ने इस हंगामे पर सख्त नाराजगी जताई और कहा कि यह सब केवल पैसे की गर्मी है। उन्होंने कहा कि जब किसी के पास अधिक पैसा होता है, तो वह मनमानी करने लगता है। इसके बाद उन्होंने बैठक छोड़ दी।


पार्टी नेतृत्व की कड़ी कार्रवाई

अखिलेश यादव के जाने के तुरंत बाद पार्टी ने कड़ा कदम उठाया। एक घंटे के भीतर एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया। दोनों जिलों के जिलाध्यक्षों और स्थानीय पदाधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद दोनों नेताओं ने माफी मांगी और खुद को पार्टी का अनुशासित सदस्य बताया। उल्लेखनीय है कि एटा की चारों सीटों पर भाजपा का कब्जा है, जबकि कासगंज की चार में से तीन सीटें सपा के पास हैं। चुनाव से पहले हुई इस गुटबाजी ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं।