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सरकार की कार्रवाई से राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स की मुश्किलें बढ़ीं

भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने अपने ही राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में, कई इन्फ्लूएंसर्स को नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि, इन इन्फ्लूएंसर्स ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ खड़े होने का निर्णय लिया है। जानें इस स्थिति का क्या असर हो सकता है और ये इन्फ्लूएंसर्स किस तरह से सरकार के नैरेटिव को चुनौती दे रहे हैं।
 

सरकार की कार्रवाई का नया मोड़

भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार और उसके अधीन केंद्रीय एजेंसियां विपक्षी दलों और उनके नेताओं के खिलाफ तो सक्रिय हैं, लेकिन अब वे अपने ही समर्थकों के खिलाफ भी खुलकर कार्रवाई कर रही हैं। एक ओर, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं पर छापे मारे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर सक्रिय राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। यूजीसी की नई नियमावली के लागू होने के बाद से, सरकार के हर कदम का विरोध कर रहे इन इन्फ्लूएंसर्स की स्थिति और भी कठिन हो गई है। इनकी समस्या यह है कि वे सरकार के खिलाफ हैं, लेकिन विपक्ष से कोई समर्थन नहीं मिल रहा।


नोटिस प्राप्त करने वाले इन्फ्लूएंसर्स

सोशल मीडिया पर लोकप्रिय तीन राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स को एक ही दिन में नोटिस मिला है। इनमें से एक को गुजरात पुलिस ने अंबेडकर पर बनाई गई एक पैरोडी के लिए नोटिस दिया, जबकि दूसरे ने किसी ईसाई धर्मगुरु पर टिप्पणी की थी। इन इन्फ्लूएंसर्स की शिकायत है कि उनके कंटेंट पर एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके पहुंच को कम करने का दबाव डाला जा रहा है। हाल ही में, भारत की खाद्य नियामक एजेंसी एफएसएसआई के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक सोशल मीडिया हैंडल को मोनेटाइजेशन से रोक दिया गया, जो सिविल सर्विसेज परीक्षाओं में गड़बड़ी और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहा था।


राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स की एकजुटता

हालांकि, राइट विंग इन्फ्लूएंसर्स पर की जा रही कार्रवाई का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है। वे पहले से अधिक एकजुट हो रहे हैं और सरकार तथा भाजपा के नैरेटिव को चुनौती दे रहे हैं।