×

सरकार की नारी शक्ति वंदन कानून और परिसीमन बिल पर आम सहमति की कोशिश

सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन बिल को संसद में पेश करने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। विशेष सत्र बुलाने की संभावना है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। इस बीच, एफसीआरए में संशोधन का बिल भी चर्चा में है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे की रणनीतियाँ और संभावित परिणाम।
 

सरकार की रणनीति

सरकार ने अभी तक नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन के बिल को संसद में पेश करने की योजना नहीं बनाई है। इसके लिए विशेष सत्र बुलाने की संभावना जताई जा रही है, जो 16 या 17 अगस्त को तीन दिनों के लिए आयोजित हो सकता है। सरकार इस बिल को पेश करने से पहले आम सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार के पास अब दो तिहाई बहुमत है, जिससे वह चाहने पर बिल को पास करा सकती है। लेकिन इस महत्वपूर्ण मुद्दे के दूरगामी प्रभावों को देखते हुए, सरकार आम सहमति की आवश्यकता महसूस कर रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू लगातार राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं से संवाद कर रहे हैं।


इससे पहले, सरकार एफसीआरए में संशोधन का बिल लाने की योजना बना रही है, जिसके लिए कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है। एफसीआरए के मुद्दे पर सरकार ने सहमति बनाने की कोशिश नहीं की है, जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि सरकार इसे मोलभाव का साधन बना सकती है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बिल पर चर्चा के दौरान बोलेंगे और जंतर मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च पर हुई पुलिस कार्रवाई पर भी अपनी बात रखेंगे। इस प्रकार, विपक्ष की एक मांग पूरी हो जाएगी।


यह भी कहा जा रहा है कि विपक्ष की अपील को ध्यान में रखते हुए, सरकार एफसीआरए बिल को टालने या इसे संसदीय समिति के पास भेजने का निर्णय ले सकती है। इसके बदले में, विपक्ष नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन बिल पर समर्थन देने के लिए तैयार हो सकता है। यदि पूरा विपक्ष सहमत नहीं होता है, तो कुछ विपक्षी पार्टियां समर्थन दे सकती हैं। उल्लेखनीय है कि शरद पवार की एनसीपी के आठ सांसद सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले हैं, जहां वे एफसीआरए बिल पर चर्चा करेंगे। संभव है कि वहां शरद पवार के सांसदों को कुछ आश्वासन मिले और वे सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार हो जाएं।