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सरकार ने एससी और ओबीसी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया

केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया है। डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है, जिससे छात्रों पर दस्तावेजों का बोझ कम होगा। यह कदम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए फायदेमंद है जो अपने गृह राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म भी शुरू किया है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
 

छात्रवृत्ति आवेदन में नई सुविधा


केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को और अधिक सुगम बना दिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए डोमिसाइल प्रमाण पत्र की आवश्यकता को समाप्त कर दिया है।


इस निर्णय से छात्रों पर दस्तावेजों का बोझ कम होगा, जिससे छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करना पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। विशेष रूप से, उन छात्रों को इसका लाभ मिलेगा जो अपने गृह राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे हैं।


सरकार के अनुसार, एससी और ओबीसी वर्ग के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत हर साल लगभग 1.2 करोड़ छात्रों को सहायता मिलती है। डोमिसाइल प्रमाण पत्र की अनिवार्यता हटने से आवेदन प्रक्रिया अधिक छात्र-अनुकूल हो जाएगी, जिससे दस्तावेजी औपचारिकताएं कम होंगी और छात्रों का समय और खर्च दोनों बचेंगे।


डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए, विभाग ने उमंग प्लेटफॉर्म पर एसईटीयू (शैक्षिक बदलाव और उत्थान के लिए स्कॉलरशिप) की शुरुआत की है। यह छात्रवृत्ति से संबंधित सभी सेवाओं के लिए एक समग्र डिजिटल प्लेटफॉर्म है।


इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से योग्य छात्र, संस्थागत नोडल अधिकारी, जिला नोडल अधिकारी और राज्य स्तरीय अधिकारी एक ही स्थान पर आवेदन पंजीकरण, आवेदन की निगरानी, सत्यापन और अन्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि होगी।


मंत्रालय ने बताया कि ये पहल सरकार के समावेशी विकास के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिसमें अनावश्यक प्रक्रियागत बाधाओं को कम करना और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना शामिल है।


विभाग ने यह भी कहा कि वह तकनीकी सुधारों के माध्यम से अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाने और उन्हें समय पर सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।


वित्त वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति वर्ग के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को 7,981.47 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की गई थी। छात्रवृत्ति योजनाओं पर खर्च में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 21 प्रतिशत, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 11.23 प्रतिशत और टॉप क्लास एजुकेशन छात्रवृत्ति योजना के तहत 13.5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।