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सरकार ने विमान किराए को विनियमित करने से किया इनकार

केंद्र सरकार ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि वह विमानों के किराए को नियंत्रित नहीं करेगी। यह निर्णय नागरिक समूहों और सुप्रीम कोर्ट की चिंताओं के बावजूद आया है। सरकार का कहना है कि विमानन कंपनियां अपने हिसाब से किराया तय करेंगी, जिससे यात्रियों को राहत की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। पिछले एक साल में घरेलू उड़ानों में किराया 35 से 115 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। जानिए इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

किराए के नियंत्रण पर सरकार का नया रुख


एक हफ्ते पहले, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी थी कि वह विमानों के किराए को नियंत्रित करने के लिए नए नियम बनाने जा रही है, जिन्हें जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार बढ़ते विमान किराए पर चिंता जताई है, और नागरिक समूह भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। जब सरकार ने कहा कि वह किराए को विनियमित करने के लिए कदम उठा रही है, तो ऐसा लगा कि यह आम जनता के लिए राहत लाएगा।


हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह विमानों के किराए को निर्धारित नहीं करेगी और न ही इसे विनियमित करेगी। केंद्र का कहना है कि विमानन कंपनियां अपनी मांग और आपूर्ति के अनुसार किराया तय करेंगी। यह स्थिति उस समय की तरह है जब गिद्ध को मांस की रखवाली पर बैठा दिया जाए। हाल के दिनों में, कई लोगों ने विमानन कंपनियों के इस खेल को उजागर किया है।


बुकिंग के समय यात्रियों को कोई सीट मुफ्त में उपलब्ध नहीं दिखाई देती, और टिकट खरीदने के बाद उन्हें सीट के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। जबकि विमानन में जाने पर बड़ी संख्या में सीटें खाली दिखती हैं। कंपनियां मनमाने तरीके से किराया वसूल रही हैं और इसके साथ ही अतिरिक्त शुल्क भी ले रही हैं।


सरकार के द्वारा बनाए गए नियमों में कहा गया है कि केवल प्राकृतिक आपदाओं या अन्य आपात स्थितियों में ही किराए को नियंत्रित किया जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि सरकार इन मामलों में भी प्रभावी नहीं हो पाई है। उदाहरण के लिए, पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के दौरान और महाकुंभ के आयोजन के समय, कंपनियों ने सरकार के निर्देशों का पालन नहीं किया और किराया कई गुना बढ़ा दिया।


कंपनियां ईंधन की कीमतों के आधार पर किराया बढ़ा रही हैं, लेकिन असल में सरकार की नीतियों के कारण दो कंपनियों का एकाधिकार बन गया है। पिछले एक साल में घरेलू उड़ानों में किराया 35 से 115 प्रतिशत तक बढ़ चुका है, और सरकार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है।