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सरकार ने संसद सत्र को लेकर स्पष्ट किया अपना रुख

केंद्र सरकार ने संसद के मौजूदा मानसून सत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कोई विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस बात की पुष्टि की है। इस बीच, राज्यसभा ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। जानें इस सत्र में चल रही राजनीतिक गतिरोध और विधायी चर्चाओं के बारे में।
 

नई दिल्ली में संसद सत्र पर स्थिति स्पष्ट


नई दिल्ली: संसद के मौजूदा मानसून सत्र के संदर्भ में चल रही चर्चाओं के बीच, केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, संसद सत्र की अवधि बढ़ाने या अगस्त के मध्य में विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बाद आया है, जिनमें विशेष सत्र आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही थी।


सरकार ने अफवाहों पर लगाया विराम

सरकारी सूत्रों ने बताया कि संसद के मौजूदा कार्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी स्पष्ट किया कि 16 से 18 अगस्त के बीच महिला आरक्षण विधेयक या परिसीमन विधेयक पर चर्चा के लिए कोई विशेष सत्र बुलाने की योजना नहीं है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में चल रही अटकलों का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।


संसद में राजनीतिक गतिरोध जारी

मानसून सत्र के दौरान लगातार हंगामे और स्थगन के बीच, सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत भी जारी है। इसी क्रम में, किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से मुलाकात की और विभिन्न विधायी मुद्दों पर चर्चा की। सरकार विपक्ष का रुख समझने की कोशिश कर रही है, जबकि सदन में कई मुद्दों को लेकर गतिरोध बना हुआ है।


राज्यसभा ने पारित किया महत्वपूर्ण विधेयक

इस बीच, राज्यसभा ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या संशोधन विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, संसद से इस विधेयक को अंतिम स्वीकृति मिल गई है। नए कानून के तहत, सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। चर्चा के दौरान न्यायिक ढांचे और अदालतों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।