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सरकार संसद में पेश करेगी राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम विधेयक

केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम विधेयक पेश करने की योजना बना रही है। यह विधेयक वंदे मातरम के अपमान को दंडनीय अपराध बनाएगा। इसके अलावा, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण में सुधार और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव भी शामिल हैं। जानें इस महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में और क्या बदलाव लाएगा यह।
 

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम विधेयक


केंद्र सरकार आगामी संसद सत्र में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक को लोकसभा में पेश करने की योजना बना रही है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का अपमान करने या इसके गायन में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।


यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो राष्ट्रीय गीत का अपमान भी राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय गान और संविधान के अपमान के समान दंडनीय अपराध माना जाएगा। इससे राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से संबंधित कानूनी प्रावधानों को और अधिक मजबूती मिलेगी।


गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के आधार पर प्रस्ताव

यह कदम गृह मंत्रालय द्वारा जारी हालिया दिशानिर्देशों के बाद उठाया जा रहा है। इन निर्देशों के अनुसार, जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान 'जन गण मन' प्रस्तुत किया जाता है, वहां वंदे मातरम का गायन या वादन भी अनिवार्य होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पहले ही इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, और अब इसे संसद के दोनों सदनों से पारित कराने की तैयारी की जा रही है।


जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक

सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक भी संसद में पेश करेगी। इस प्रस्ताव के तहत, दो वर्ष से अधिक की देरी से दर्ज कराए जाने वाले जन्म और मृत्यु के मामलों में पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही संभव होगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से फर्जी दस्तावेजों के निर्माण की संभावना कम होगी और नागरिक अभिलेखों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।


सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि

मानसून सत्र में, सरकार सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक भी पेश करेगी। इस विधेयक के माध्यम से उस अध्यादेश को संसद की मंजूरी दिलाई जाएगी, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई है। सरकार का कहना है कि न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार होगा। 20 जुलाई से शुरू होने वाला संसद का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों के कारण विशेष माना जा रहा है।