सर्वोच्च न्यायालय ने NEET UG पेपर लीक पर सख्त टिप्पणी की
सर्वोच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी
NEET UG परीक्षा के पेपर लीक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि पेपर लीक के बाद भी नेशनल टैस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने कोई सबक नहीं सीखा। सोमवार को अदालत ने एनटीए को भंग करने की मांग पर सुनवाई की। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीआई से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी। लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। परीक्षा का पेपर लीक होना और फिर परीक्षा का रद्द होना अत्यंत दुखद है।
एनटीए को एफिडेविट फाइल करने का आदेश
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की विशेष बेंच एनटीए को भंग कर एक स्वतंत्र और सक्षम एजेंसी के गठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने एनटीए को 2024 पेपर लीक के बाद जारी निर्देशों का पालन करने के लिए एफिडेविट फाइल करने का आदेश दिया है। इस एफिडेविट में 14 नवंबर, 2024 को गठित निगरानी समिति की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।
डॉ. एके राधाकृष्णन को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने निगरानी समिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एके राधाकृष्णन को भी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें हाई पावर कमेटी को दिए गए आदेशों का पालन करने की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट ने तीन दिन का समय निर्धारित किया है।
छात्रों की चिंता और राजनीतिक प्रतिक्रिया
नीट यूजी के पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के कारण छात्र काफी परेशान हैं। कई छात्र आत्महत्या कर रहे हैं, और कई अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए कर्ज लेकर तैयार कराते हैं। परीक्षा का रद्द होना उनके लिए एक गंभीर संकट बन गया है। इसके अलावा, यह मामला राजनीतिक रूप से भी गर्माया हुआ है, और विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।