साउथ सिनेमा के सितारे: राजनीति में भी चमकते हुए
साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सितारों का राजनीतिक सफर
चेन्नई: साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों की पहचान केवल उनके अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे राजनीति में भी अपनी छाप छोड़ते हैं। विश्वभर में साउथ के सितारों को उनके अभिनय के लिए सराहा जाता है, लेकिन कई ने राजनीति में भी कदम रखा है और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में सफल रहे हैं। वर्तमान में, 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के नेता और सुपरस्टार थलपति विजय चुनावी मैदान में हैं और मुख्यमंत्री पद के लिए एक मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं। इस संदर्भ में यह जानना दिलचस्प है कि साउथ के इतिहास में किन-किन दिग्गज कलाकारों ने मुख्यमंत्री का पद संभाला है।
तमिलनाडु का इतिहास बदलने वाले एमजीआर और करुणानिधि
एम जी रामचंद्रन (एमजीआर) तमिलनाडु के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने मुख्यमंत्री का पद प्राप्त किया। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उन्होंने तीन बार चुनाव जीतकर 10 वर्षों तक इस पद पर कार्य किया। उन्हें फिल्मों में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले, जिसमें 'भारत रत्न' भी शामिल है। वहीं, एम करुणानिधि ने 1969 से 2011 के बीच पांच बार मुख्यमंत्री बनकर राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
एनटी रामाराव और जयललिता का राजनीतिक प्रभाव
एनटी रामाराव (एनटीआर) भारतीय सिनेमा के महानतम अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने 1983-84, 1984-89 और 1994-95 में तीन अलग-अलग कार्यकालों में मुख्यमंत्री का पद संभाला। इसी तरह, जे जयललिता ने भी राजनीति में अपनी पहचान बनाई और छह कार्यकालों में कुल 14 वर्षों तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं।
जानकी रामचंद्रन से पवन कल्याण तक का सफर
इस सूची में जानकी रामचंद्रन का नाम भी शामिल है, जो एमजीआर की तीसरी पत्नी थीं। उन्होंने 1988 में कुछ हफ्तों के लिए मुख्यमंत्री का पद संभाला। इसके अलावा, साउथ के मेगास्टार चिरंजीवी केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, जबकि उनके छोटे भाई पवन कल्याण वर्तमान में आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री हैं और राजनीति के साथ-साथ फिल्मों में भी सक्रिय हैं।