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सिलीगुड़ी कॉरिडोर: भारत की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

सिलीगुड़ी कॉरिडोर का भारत की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व पर गहरा प्रभाव है। यह कॉरिडोर न केवल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उत्तर-पूर्वी राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। हाल के घटनाक्रमों ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जानें कैसे बांग्लादेश और चीन इस कॉरिडोर के संदर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके कटने से क्या परिणाम हो सकते हैं।
 

बांग्लादेश में तख्तापलट और भारत के खिलाफ बयानबाजी

दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में एक तख्तापलट हुआ, जिसके बाद का माहौल भारत के प्रति नकारात्मक हो गया। इस दौरान, एक रैली में तख्तापलट के एक प्रमुख नेता हसनत अब्दुल्ला ने भारत को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश की स्थिरता को खतरा हुआ, तो बांग्लादेश भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलगाववादियों को समर्थन दे सकता है, जिससे सिलिगुड़ी कॉरिडोर प्रभावित हो सकता है। हसनत अब्दुल्ला का यह बयान सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए एक स्पष्ट धमकी के रूप में देखा गया। यह पहली बार नहीं था जब बांग्लादेश ने इस कॉरिडोर के खिलाफ बयान दिए थे। लगभग आठ महीने पहले, अप्रैल 2025 में, बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चीन की यात्रा के दौरान उत्तर-पूर्व को लैंड लॉक्ड बताया था। उन्होंने कहा था कि उत्तर-पूर्व का समुद्र तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बांग्लादेश से होकर गुजरता है।


सिलीगुड़ी का ऐतिहासिक महत्व

सिलीगुड़ी का इतिहास सिक्किम के नाम्याल राजवंश से शुरू होता है। 1642 में फुंटसोख नामगयाल ने सिक्किम पर शासन करना शुरू किया। 18वीं सदी में बंगाल अंग्रेजों के अधीन आ चुका था, और नेपाल भी सिक्किम पर कब्जा करना चाहता था। 1817 में सिक्किम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ टिटालिया की संधि की। 1835 में दार्जिलिंग को सिक्किम के राजा ने कंपनी को सौंप दिया। इस क्षेत्र का प्रशासन फासीदेवा से होता था, जिसे बाद में सिलीगुड़ी कहा गया।


चिकन नेक कॉरिडोर का महत्व

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो 60 किलोमीटर लंबा और 20 किलोमीटर चौड़ा है, उत्तर-पूर्वी राज्यों को भारतीय मुख्य भूमि से जोड़ता है। यह कॉरिडोर न केवल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार भी है। इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर ध्यान केंद्रित किया है।


सुरक्षा के लिहाज से कॉरिडोर का महत्व

पूर्वोत्तर के राज्यों में सिक्किम को छोड़कर बाकी सभी को सेवन सिस्टर्स कहा जाता है। यदि चिकन नेक कट जाता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का मुख्य भूमि से संपर्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इससे अलगाववादी ताकतें फिर से सक्रिय हो सकती हैं, जिससे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है।


चीन और बांग्लादेश के संदर्भ में सिलीगुड़ी का महत्व

चीन के लिए चिकन नेक भारत को रणनीतिक रूप से कमजोर करने का एक साधन है, जबकि बांग्लादेश भारत के लिए एक भौगोलिक कुंजी है। इसलिए, भारत सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को भी मजबूत बनाए रखना चाहता है।