सीएम रेखा गुप्ता का विपक्ष पर हमला: महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी शर्मनाक
महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति का खेल
विपक्ष बना ‘ऑल इंडिया एंटी रिफॉर्म कांग्रेस’, महिलाओं के हक पर राजनीति शर्मनाक: CM रेखा गुप्ता
‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देने वाले ही महिलाओं के अधिकार के खिलाफ: सीएम रेखा गुप्ता
महिला भाजपा नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारी शक्ति वंदन अधिनियम व प्रधानमंत्री के समर्थन में नारे
नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को महिला आरक्षण विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई घटनाओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दिनों में संसद में जो हुआ, वह बेहद निराशाजनक है और यह देश की महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है। आजादी के 78 वर्षों बाद भी देश की बेटियां अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने उन राजनीतिक दलों पर निशाना साधा जो ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देते रहे, लेकिन अब महिलाओं की इस लड़ाई से पीछे हट गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बेटियों की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है?
दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पिछले 30 वर्षों से संसद में आता रहा है, लेकिन हर बार इसे किसी न किसी बहाने से रोका गया। कभी इसे फाड़ा गया, कभी दबाया गया और कभी जलाया गया। इस बार भी विपक्ष ने जानबूझकर इसे पास नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 2023 में पारित विधेयक में यह स्पष्ट है कि महिलाओं के लिए आरक्षण डिलिमिटेशन के बाद लागू होगा। ऐसे में आज उसी प्रावधान पर विरोध करना विरोधाभासी है। जब 2023 में यही शर्त स्वीकार की गई थी, तो आज विरोध किस बात का है?
विपक्ष द्वारा 543 सीटों के भीतर 33 प्रतिशत आरक्षण देने के तर्क पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसा किया जाए तो पहले यह स्पष्ट किया जाए कि कौन से पुरुष जनप्रतिनिधि अपनी सीट छोड़ने को तैयार हैं। केंद्र सरकार का प्रस्ताव एक ‘विन-विन’ समाधान था, जिसमें सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता। साथ ही, मौजूदा प्रतिनिधियों का नुकसान नहीं होता, और राज्यों तथा क्षेत्रीय दलों का प्रतिनिधित्व भी सुरक्षित रहता। उन्होंने कहा कि 1971 से लोकसभा की सीटें 543 पर स्थिर हैं, जबकि उस समय देश की जनसंख्या लगभग 50 करोड़ थी और आज यह 150 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में सीटों का पुनर्वितरण और वृद्धि समय की मांग है। यह सही अवसर है जब सीटें बढ़ाई जा सकती हैं और महिलाओं को उनका अधिकार दिया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने ‘कोटे में कोटा’ की मांग पर विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल बहानेबाजी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल साधारण अधिकार नहीं, बल्कि हर चीज एक साथ चाहिए, जबकि बुनियादी अधिकार, यानी महिलाओं को संसद और विधानसभा तक पहुंचने का अवसर देने पर भी वे सहमत नहीं हैं। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जब ट्रिपल तलाक कानून लाया गया या शाहबानो मामले में न्यायालय का निर्णय आया, तब इन्हीं दलों ने उसका विरोध किया था। आज उनका यह रुख केवल दिखावा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विपक्ष से कहा कि इसका श्रेय आप ले लीजिए, लेकिन महिलाओं के हित में इस विधेयक को पारित कर दीजिए, फिर भी विपक्ष तैयार नहीं हुआ। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी ‘ऑल इंडिया एंटी रिफॉर्म कांग्रेस’ बन चुकी है, जिसने हर बड़े सुधार का विरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जैसे 10 करोड़ शौचालयों का निर्माण, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना, पोषण और स्वास्थ्य योजनाएं, मातृत्व लाभ, और सेना तथा वायुसेना में महिलाओं की भागीदारी। इसी कारण देश की महिलाओं का भरोसा लगातार बढ़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेताओं को डर है कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाएं राजनीति में प्रवेश कर स्थापित नेताओं और परिवारों को चुनौती देंगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए 2029 तक इस विधेयक का पूर्ण क्रियान्वयन कठिन प्रतीत होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं को उनके अधिकार के लिए और 5-10 वर्षों तक क्यों इंतजार करना पड़े? उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की स्थानीय निकायों में लगभग 15 लाख महिला जनप्रतिनिधि हैं, लेकिन विधानसभा में उनकी संख्या लगभग 400 और लोकसभा में मात्र 78 है। अगर सब कुछ ‘ऑटो मोड’ पर होता तो महिलाएं स्वतः उच्च स्तर की राजनीति में पहुंच जातीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इसलिए नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहा जितना तपता है, उतना ही मजबूत होता है और सोना जितना आग में तपता है, उतना ही चमकता है। देश की बेटियां भी उसी तरह संघर्ष कर अपना स्थान बनाएंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री देश की बेटियों के साथ हैं और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता एवं विधायक शिखा रॉय द्वारा संयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक पूनम भारद्वाज, दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष योगिता सिंह, लता गुप्ता, सुनीता कांगड़ा, मंत्री सारिका जैन, सोना कुमारी, महिला मोर्चा अध्यक्ष ऋचा पांडेय, प्रभारी श्याम बाला और महामंत्री सरिता तोमर उपस्थित थीं। सभी ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में हाथ उठा कर नारी शक्ति वंदन अधिनियम एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक शिखा राय ने कहा कि भाजपा ने इस नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर अपनी सोच और नीयत उसी वक्त स्पष्ट कर दी थी जब रेखा जी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। उन्होंने कहा कि यह सीढ़ी थी बाकी महिलाओं के लिए जो राजनीति में आना चाहती थीं। विधानसभा और लोकसभा में इस तरह का अधिकारिक प्रवेश मिलना था, जिसे कांग्रेस ने खासकर राहुल गांधी ने रोक दिया। परिवारवादी पार्टियां खुद के घर की महिलाओं को राजनीति में ले आती हैं, लेकिन अन्य महिलाओं को रोकती हैं। इस अधिनियम का पारित होना बहुत जरूरी था, इसे रोककर अन्याय किया गया है।