सीजेपी का मार्च: सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति, दिल्ली पुलिस की चुनौती
सीजेपी का मार्च और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च करने की योजना बनाई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस इस मार्च की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पुलिस को झटका दिया है, जिसने सीजेपी के मार्च पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद, दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की अनुमति मांगने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
दिल्ली पुलिस अब एफआईआर रद्द करके सीजेपी की एक और मांग को पूरा करने की दिशा में बढ़ रही है। इस स्थिति में सवाल उठता है कि क्या सीजेपी का प्रदर्शन अब टल जाएगा? ध्यान देने योग्य है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी की पहली मांग थी, इसके बाद एफआईआर रद्द करना और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देना दो अन्य प्रमुख मांगें थीं। पहली मांग पूरी हो चुकी है और अब दूसरी भी पूरी की जा रही है। इसके बाद मुआवजे का निर्णय लेना बाकी है।
हालांकि, मुआवजे की मांग को जल्दी पूरा करना आवश्यक होगा, क्योंकि 5 सितंबर के मार्च में सीजेपी ने नीट यूजी परीक्षा के रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को भी आमंत्रित किया है। यदि सरकार इन मांगों को नहीं मानती है, तो यह एक बड़ा भावनात्मक मुद्दा बन सकता है।
दिल्ली पुलिस के लिए एक और चुनौती यह है कि 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में ब्रिक्स लीडरशिप सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल होंगे। इसलिए, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां एक सप्ताह पहले से अलर्ट मोड में रहेंगी। इन दोनों नेताओं की सुरक्षा के लिए एडवांस टीम भी भारत पहुंच जाएगी, जो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय करेगी। सीजेपी ने जानबूझकर इस समय को चुना है, जिससे सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए मजबूर किया जा सके।