सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: यूपी के दैनिक वेतनभोगियों को मिलेगी नियमितीकरण की राहत
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
उत्तर प्रदेश के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस फैसले में, कोर्ट ने उन कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश दिया है, जो दशकों से अस्थायी आधार पर कार्यरत थे। इसके साथ ही, उन्हें बकाया वेतन और पेंशन लाभ भी दिए जाएंगे।
यह मामला उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से संबंधित है, जहां छह कर्मचारियों को 1989 से 1992 के बीच नियुक्त किया गया था। इनमें से पांच कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कार्यरत थे, जबकि एक चालक के रूप में कार्य कर रहा था। ये कर्मचारी लंबे समय से दैनिक वेतन पर काम कर रहे थे, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया था।
सरकार ने नियमित पदों के सृजन से इनकार किया था, जिसका कारण वित्तीय कठिनाइयां बताई गई थीं। कर्मचारियों ने इस निर्णय को चुनौती दी और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त 2025 को इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार को कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब किसी संस्थान में काम लगातार होता है, तो उसके अनुसार पदों का सृजन किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिसमें नियमितीकरण, वेतनमान का लाभ, बकाया वेतन का भुगतान, वरिष्ठता और प्रमोशन का लाभ शामिल हैं।
इस फैसले का महत्व यह है कि यह अन्य राज्यों के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि सभी कर्मचारियों को अपने-अपने मामलों के अनुसार ही लाभ मिलेगा।
इस फैसले से यह सीख मिलती है कि लंबे समय तक अस्थायी स्थिति में रहना उचित नहीं है, और कर्मचारियों को अपने सेवा संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।
फैसले का नाम: Dharam Singh & Others v. State of U.P. & Another
केस नंबर: Civil Appeal No. 8558 of 2018
निर्णय की तारीख: 19 अगस्त 2025
न्यायमूर्ति: Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta