सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पहचान पत्रों की वैधता पर सवाल
पहचान पत्रों की भूमिका पर नई बहस
यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि पहचान के लिए उपयोग किए जाने वाले तीन प्रमुख पहचान पत्रों का क्या महत्व रह गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित याचिकाओं का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि ये पहचान पत्र किसी की नागरिकता को प्रमाणित नहीं करते हैं। यह स्थिति और भी गंभीर है, क्योंकि इन दस्तावेजों के आधार पर कोई व्यक्ति मतदाता नहीं बन सकता। उदाहरण के लिए, यदि किसी के पास मतदाता पहचान पत्र है और उसने 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदान किया है, तो भी वह मतदाता सूची में अपना नाम नहीं जोड़ सकता। यह समस्या पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में देखी जा रही है, और अब जिन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का कार्य चल रहा है, वहां भी यही स्थिति होगी।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया
एसआईआर के तीसरे चरण में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का शुद्धिकरण किया जा रहा है, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। यदि दिल्ली में किसी व्यक्ति के पास आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड है, तो भी वह मतदाता सूची में अपना नाम नहीं जोड़ पाएगा। यह सोचने वाली बात है कि लोगों ने आधार बनवाने के लिए कितनी मेहनत की थी। अब यदि किसी को आधार में कोई बदलाव करना हो, तो उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इसी तरह, वोटर आईडी बनवाना भी आसान नहीं है। लोगों ने मेहनत से ये सभी दस्तावेज बनाए, लेकिन अब इनकी मदद से मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़ सकता। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, इन तीन में से किसी एक या सभी दस्तावेजों के होने के बावजूद, किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता होगी तब जाकर मतदाता सूची में नाम शामिल किया जा सकेगा।