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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट से नाम हटने पर नहीं खत्म होती नागरिकता

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब नागरिकता का समाप्त होना नहीं है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष संशोधन (SIR) से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग का कार्य नहीं है, और इस मामले में संबंधित मंत्रालय को निर्णय लेना होगा। इस निर्णय से उन लोगों को राहत मिली है जो SIR के कारण अपनी नागरिकता को लेकर चिंतित थे। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर और क्या कहा गया।
 

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया नागरिकता का मुद्दा


नई दिल्ली: देश में वोटर लिस्ट के विशेष संशोधन (SIR) को लेकर फैले भ्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट की। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाता है, तो इससे उसकी नागरिकता अपने आप समाप्त नहीं होती। नागरिकता की पहचान करने की प्रक्रिया अलग होती है और यह चुनाव आयोग का कार्य नहीं है। यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान आई।


सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। चुनाव आयोग का कार्य केवल वोटर लिस्ट का प्रबंधन और निगरानी करना है।


कोर्ट ने बताया कि कानून की स्थिति स्पष्ट है। यदि कोई ट्रिब्यूनल किसी व्यक्ति का नाम SIR की सूची में शामिल नहीं करने का आदेश देता है, तो चुनाव आयोग को नागरिकता का निर्णय नहीं लेना है। ऐसे मामलों को नागरिकता निर्धारण के लिए संबंधित मंत्रालय को भेजा जाना चाहिए।


कोर्ट ने कहा, "मतदाता सूची में नाम न होने से नागरिकता अपने आप समाप्त नहीं होती।" इसके साथ ही, विधानसभा क्षेत्र के आधार पर SIR की जानकारी मांगने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।


SIR और नागरिकता का संबंध

सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि SIR और वोटर लिस्ट का नागरिकता से कोई सीधा संबंध नहीं है। हाल के दिनों में इस मुद्दे पर कई अफवाहें फैली हैं। हाल ही में झारखंड से एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें दावा किया गया कि SIR फॉर्म भरवाने के नाम पर लोगों से 50 से 100 रुपये तक की वसूली की जा रही है। वीडियो में कहा गया कि "नागरिकता न जाए" इसके लिए ये पैसे "खर्चा-पानी" के तौर पर लिए जा रहे हैं। ऐसे वीडियो के चलते लोगों में डर और भ्रम बढ़ गया था।


चुनाव आयोग की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का कार्य केवल वोटर लिस्ट बनाना, उसे अपडेट करना और चुनाव कराना है। किसी को भारतीय नागरिक मानना या न मानना, यह गृह मंत्रालय और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का विषय है।


कोर्ट की इस टिप्पणी से उन लोगों को राहत मिली है जो SIR के कारण अपनी नागरिकता को लेकर चिंतित थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फर्जी वसूली और अफवाहों पर भी नियंत्रण लगेगा। अब 25 अगस्त को होने वाली सुनवाई में पश्चिम बंगाल SIR के संबंध में और विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी।