सुप्रीम कोर्ट का सबरीमाला मामले में महत्वपूर्ण बयान: हिंदू समाज को एकजुट रहना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक भेदभाव से बचना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से संबंधित मामले की सुनवाई की। जस्टिस वीबी नागरत्ना ने इस दौरान कहा कि हिंदू समाज को एकजुट रहना चाहिए और संप्रदायों में विभाजित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि एक संप्रदाय अपने मंदिर को दूसरों के लिए बंद रखता है, तो वह कमजोर हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के वकील राकेश द्विवेदी की बात पर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक संप्रदाय को दूसरे के मंदिर में पूजा करने से रोका जा रहा है। यदि राज्य अन्य संप्रदायों के लोगों को अनुमति देना चाहता है, तो इसे सामाजिक सुधार के तहत सही ठहराया जा सकता है।
महिलाओं की एंट्री पर मंदिर प्रशासन का विरोध
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। इस मामले में धार्मिक आस्था से जुड़े 66 अन्य मामले भी शामिल हैं। केरल हाईकोर्ट ने 1991 में मासिक धर्म वाली महिलाओं (10-50 साल) की एंट्री पर रोक लगाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस बैन को हटा दिया। इसके खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर अब सुनवाई चल रही है। मंदिर प्रशासन महिलाओं की एंट्री का विरोध कर रहा है।