सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: NEET परीक्षा में धांधली पर सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
नई दिल्ली: देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' में हो रही धांधली के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय ने एक गंभीर और भावुक बयान दिया है। परीक्षा में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित लाखों छात्रों के समर्थन में खड़े होते हुए, अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिभाशाली युवाओं को इस तरह निराश नहीं होने दिया जा सकता। इस मामले में सरकार से सीधे जवाब मांगा गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
सिस्टम में सुधार की आवश्यकता
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने याचिकाओं की सुनवाई के दौरान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि जब तक इस प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों की जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक यह समस्या समाप्त नहीं हो सकती। बेंच ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल एक परीक्षा को रद्द करने का मामला नहीं हैं, बल्कि यह देश के ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
'चंद लोगों की वजह से लाखों के भविष्य से नहीं खेला जा सकता'
अदालत ने इस स्थिति को अत्यंत दुखद और संवेदनशील बताया। जजों ने कहा कि जब एक छात्र किसी महत्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी करता है, तो उसमें उसके जीवन के कई साल, कठिन परिश्रम और उसके परिवार की भावनाएं शामिल होती हैं। माता-पिता अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी सारी बचत लगा देते हैं। ऐसे में किसी एजेंसी की लापरवाही या कुछ लोगों के लालच के कारण उनकी मेहनत को बर्बाद नहीं होने दिया जा सकता।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि केंद्र इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि 21 जून को होने वाले नीट-यूजी री-टेस्ट को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
परीक्षा एजेंसी के पुनर्गठन की मांग
अदालत में दायर याचिकाओं में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि परीक्षाओं को निष्पक्षता से कराने के लिए या तो एनटीए के ढांचे में व्यापक बदलाव किया जाए या फिर किसी अन्य स्वायत्त और मजबूत संस्था का गठन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अब सरकार से पूछा है कि वह विशेषज्ञों की भागीदारी और संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठा रही है।
अदालत ने इन सभी दलीलों को सुनने के बाद केंद्र सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है, जिसमें सुरक्षा और सुधारों का पूरा खाका पेश करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी। उल्लेखनीय है कि 3 मई को हुई परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था, जिसकी जांच वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है।