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सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को राहत देने से किया इनकार, धोखाधड़ी के आरोपों पर सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को राहत देने से इनकार कर दिया है, जिससे उनके खिलाफ चल रहे वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सुनवाई जारी रहेगी। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को खारिज कर दिया। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे की सुनवाई की स्थिति क्या है।
 

अनिल अंबानी को राहत नहीं मिली

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिजनेसमैन अनिल अंबानी को राहत देने से मना कर दिया है। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच के निर्णय को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। इस निर्णय में इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति दी गई थी। इसके साथ ही, कोर्ट ने दिसंबर 2025 में दिए गए अपने एकल न्यायाधीश के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसने अनिल अंबानी को अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने यह स्पष्ट किया कि बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश उस मामले में बाधा नहीं बनेगा, जो अभी भी सुनवाई के लिए लंबित है।


कोर्ट ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस मामले का शीघ्र निपटारा करे। कोर्ट ने कहा कि एकल बेंच के आदेश के अनुसार, डिवीजन बेंच का आदेश उस मुकदमे के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा। हम बॉम्बे हाई कोर्ट से निवेदन करते हैं कि वह इस सिविल मुकदमे का निपटारा जल्द से जल्द करे। याचिकाकर्ता अनिल अंबानी के पास कानून के तहत अन्य उपायों का उपयोग करने की स्वतंत्रता है। याचिकाकर्ता की इस बात पर कि वह बैंकों के साथ समझौता करना चाहता है, हम कोई राय नहीं देते हैं। इससे पहले, 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करें। यह निर्देश 23 मार्च को दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान लिया। ED ने कोर्ट को बताया कि RAAG से जुड़े मामलों की जांच के लिए 12 फरवरी, 2026 को एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इस SIT में ED के वरिष्ठ अधिकारी, फोरेंसिक विश्लेषक और बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं। ED की रिपोर्ट के अनुसार, आठ मामलों में जांच शुरू हो चुकी है और कई दस्तावेज पहले ही जब्त किए जा चुके हैं। एजेंसी ने एक संदिग्ध प्रोजेक्ट हेल्प की ओर भी इशारा किया, जिसके तहत कथित तौर पर ऐसे ऋणदाताओं के माध्यम से दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की गई थी, जिनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था।


इसमें आगे यह भी दावा किया गया कि लगभग 2,983 करोड़ रुपए के दावों का निपटारा केवल 26 करोड़ रुपए में कर दिया गया, जिससे संभावित वित्तीय गड़बड़ी की आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं। CBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सात मामलों की जांच अभी सक्रिय रूप से चल रही है, जिनमें पांच हालिया FIR भी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि अकेले एक मामले में ही कथित तौर पर 2,223 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि सभी मामलों को मिलाकर कुल दावों की रकम लगभग 73,006 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। एजेंसी सरकारी कर्मचारियों की भूमिका और वित्तीय संस्थानों के साथ उनकी संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है।