×

सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को दी बड़ी राहत, हेट स्पीच मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। अदालत ने उनके खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले का निर्णय बरकरार रखते हुए, अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह मामला 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में दिए गए भाषणों से जुड़ा है। जानिए इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी।
 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय


नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ हेट स्पीच के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। इससे पहले का अदालत का निर्णय बरकरार रहेगा, और दोनों नेताओं के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।


पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में दायर पुनर्विचार याचिका की सुनवाई करते हुए इसे खारिज कर दिया। यह याचिका सीपीएम नेता वृंदा करात द्वारा दायर की गई थी, जिसमें अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ भड़काऊ भाषणों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया और अपने पूर्व निर्णय को सही ठहराया।


अप्रैल 2026 का निर्णय

अप्रैल 2026 के फैसले पर कायम रही अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अप्रैल 2026 में इस मामले में अपना निर्णय सुनाया था, जिसमें दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को अस्वीकार किया गया था। पुनर्विचार याचिका के खारिज होने के बाद वही निर्णय प्रभावी रहेगा, जिससे दोनों नेताओं को राहत मिलती है।


CAA विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामला

2020 के CAA विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला

यह मामला 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान दिए गए कथित भाषणों से संबंधित है। आरोप था कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों ने नफरत फैलाने और माहौल को प्रभावित करने का प्रयास किया। इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।


सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद, इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका समाप्त हो गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहले का आदेश ही लागू रहेगा, जिससे दोनों नेताओं को इस मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।