सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज की, चुनाव आयोग पर भरोसा करने का दिया निर्देश
टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले, टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। शनिवार को, कोर्ट ने टीएमसी की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। यह मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को कोई आदेश नहीं दिया जा सकता है। यह चुनाव आयोग का अधिकार है, और उन पर भरोसा करना चाहिए। टीएमसी की ओर से सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें चुनाव आयोग से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। इससे पहले, टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में भी अपील की थी।
हाईकोर्ट ने टीएमसी की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा था कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है, और इसमें कोई अवैधता नहीं है। बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव हुए हैं, और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
टीएमसी का आरोप: केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में
चुनाव आयोग ने 13 अप्रैल को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र का होना अनिवार्य है। टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, इसलिए राज्य सरकार के कर्मचारियों की भी नियुक्ति की जानी चाहिए। टीएमसी ने इस संबंध में चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी।