सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी पेपर लीक मामले में एनटीए की जवाबदेही तय करने की मांग की
नीट यूजी परीक्षा पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश के लिए आयोजित नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक जिम्मेदारी निर्धारित नहीं होती, ऐसी घटनाएं जारी रहेंगी। सर्वोच्च न्यायालय ने परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से पूछा कि यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक नहीं होते, तो एनटीए को उनसे सीखने की आवश्यकता है।
इससे पहले 25 मई को हुई सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को यह बताया था कि पिछले दो वर्षों में हुए पेपर लीक से उसने कोई सबक नहीं लिया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं नीट पेपर लीक की जांच पर ध्यान दे रहे हैं ताकि कोई चूक न हो। एनटीए ने नीट यूजी की पुनः परीक्षा 21 जून को कराने का निर्णय लिया है, जिसमें सेना की सहायता ली जाएगी।
सुनवाई के दौरान, जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से नीट यूजी परीक्षा की जांच प्रक्रिया का विवरण मांगा। सॉलिसीटर जनरल ने बताया कि पेपर लीक के बाद कई सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा, 'हम युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर हैं। नीट यूजी के पुनः टेस्ट के लिए नए तरीके अपनाए गए हैं।' ध्यान रहे कि नीट यूजी परीक्षा 3 मई को हुई थी और 7 मई को पेपर लीक की खबर आई थी, जिसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई।
एनटीए को भंग करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने 2024 में नीट पेपर लीक के बाद बनाई गई समिति के प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन से पूछा कि सिफारिशों और सुधारों के बावजूद इस बार नाकामी क्यों हुई। कोर्ट ने कहा, 'एनटीए अभी स्थायी और मजबूत संस्था के रूप में कार्य नहीं कर रही है। केंद्र सरकार एनटीए को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाएगी?' सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि एनटीए को आईआईटी और अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से आयोजित की जा सकें।