सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और राजद जैसी सभी विपक्षी पार्टियों की आपत्तियों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने एसआईआर को वैध और संवैधानिक मानते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को लागू करने का अधिकार है। इस प्रकार, एसआईआर की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाला मामला समाप्त हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया केवल चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि आयोग के पास किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर नागरिक घोषित करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही, अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर जिन व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके नाम चार हफ्ते के भीतर केंद्र सरकार को भेजे जाएं।
यह ध्यान देने योग्य है कि जून 2025 में बिहार से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया अब तक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान 7.41 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें सबसे अधिक 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश से कटे। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी एसआईआर किया गया, जबकि असम में विशेष समीक्षा की गई। बिहार में एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं से यह मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसके बाद, पश्चिम बंगाल से भी कई याचिकाएं दायर की गईं। बंगाल में एसआईआर से संबंधित कुछ मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं।