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सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए नियमों पर सुनवाई: क्या मिलेगी छात्रों को राहत?

सुप्रीम कोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुनवाई हुई, जिसमें केंद्र सरकार ने एक समिति बनाने का आश्वासन दिया। सरकार ने कहा कि नए नियम लागू होने के बाद छात्रों को किसी प्रकार की चिंता नहीं होगी। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने छात्रों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता दी। UGC के नियमों के खिलाफ दायर याचिका में भेदभाव का आरोप लगाया गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि समिति क्या सुझाव देती है और सरकार का अगला कदम क्या होगा।
 

सुप्रीम कोर्ट में UGC नियमों पर सुनवाई


नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि इन नियमों पर पुनर्विचार के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि नए नियम लागू होने के बाद छात्रों को किसी प्रकार की चिंता या भय नहीं रहेगा। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना सर्वोपरि है। इस मामले में केंद्र सरकार को और समय दिया गया है।


जनवरी में नियमों पर लगी थी रोक

UGC ने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम बनाए थे, जो 13 जनवरी 2026 को लागू होने थे। लेकिन जैसे ही ये नियम लागू हुए, विवाद शुरू हो गया। देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि इन नियमों में एक विशेष वर्ग के साथ भेदभाव किया जा रहा है। विवाद बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में ही इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। तब से इस मामले की सुनवाई जारी है।


सरकार की चिंताओं का समाधान

हाल की सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच को बताया कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसी भी वर्ग में असंतोष या आशंका न रहे। पिछली सुनवाई में भी तुषार मेहता ने कहा था कि UGC नए नियमों पर पुनर्विचार कर रहा है, जिसके बाद कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया था।


याचिका में क्या आरोप है?

UGC के नियमों के खिलाफ दायर याचिका में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 के एक प्रावधान को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि नियम का 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है, जिससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किए जाने का खतरा है। याचिका के अनुसार, यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसके अलावा, यह नियम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ हैं और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाते हैं।


आगे की राह

इस समय सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर लगी रोक को बनाए रखा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुनर्विचार के लिए बनाई जाने वाली समिति क्या सुझाव देती है और सरकार आगे क्या निर्णय लेती है।