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सुप्रीम कोर्ट में हवारा के स्थानांतरण पर IB की चेतावनी

इंटेलिजेंस ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट में चेतावनी दी है कि जगतार सिंह हवारा का पंजाब की जेल में स्थानांतरण राज्य की कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। हवारा, जो बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है, ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है। हालांकि, IB ने उसकी उच्च जोखिम वाली श्रेणी को देखते हुए स्थानांतरण का विरोध किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को तीन महीने के लिए टाल दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।
 

पंजाब समाचार:

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी जगतार सिंह हवारा को तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने से राज्य की कानून-व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ब्यूरो ने अदालत को बताया कि यदि हवारा को पंजाब की जेल में भेजा जाता है, तो इससे आगामी विधानसभा चुनाव पर भी असर पड़ सकता है।


कोर्ट ने निर्णय को तीन महीने के लिए टाला

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर से कहा कि एजेंसी की रिपोर्ट गंभीर है। मुरलीधर ने सुझाव दिया कि यदि चुनावों की चिंता है, तो मामले की सुनवाई तीन महीने बाद की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगले साल फरवरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।


पंजाब में स्थानांतरण न करने की सलाह

एजेंसी ने हवारा को उच्च जोखिम वाले कैदी के रूप में वर्गीकृत करते हुए उसे पंजाब की जेल में स्थानांतरित न करने की सलाह दी। पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने वाले हैं। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को हवारा की स्थानांतरण याचिका पर IB से रिपोर्ट लेने का निर्देश दिया था।


हवारा के स्थानांतरण का आधार

हवारा ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके खिलाफ दिल्ली में कोई मामला लंबित नहीं है। वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब का निवासी है और उसे राज्य की किसी जेल में रखा जाना चाहिए। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनवरी 2004 में जेल से फरार होने की घटना को छोड़कर, उसका जेल में आचरण अच्छा रहा है। उसकी बेटी भी पंजाब में रहती है। हवारा को मार्च 2007 में निचली अदालत ने मृत्युदंड सुनाया था, जिसे बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया।


हवारा किस मामले में बंद है?

हवारा अगस्त 1995 में चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए बम विस्फोट के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 17 लोगों की मौत हुई थी। दिल्ली सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवारा पहले जेल से फरार हो चुका है, और उसके स्थानांतरण से फिर से फरार होने का खतरा बढ़ सकता है।


चंडीगढ़ जेल से भागने की घटना

हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, तारा और हत्या के मामले में दोषी देवी सिंह ने 22 जनवरी, 2004 को चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल से लगभग 100 फुट लंबी सुरंग खोदकर भागने में सफलता पाई थी। हवारा और भ्यौरा को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि तारा को थाईलैंड में पकड़ा गया। देवी सिंह अब भी फरार है।