सुवेंदु अधिकारी ने कालीघाट मंदिर में मां काली की पूजा की
मुख्यमंत्री का कालीघाट मंदिर दौरा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार शाम को कालीघाट मंदिर का दौरा किया। कौशिकी अमावस्या के अवसर पर उन्होंने मां काली की पूजा की और पारंपरिक भोग का सेवन किया। इस भोग में मछली का सिर, तली हुई मछली और बसंती पुलाव शामिल था। अधिकारी को फर्श पर बैठकर प्रसाद खाते हुए देखा गया।
भोजनों पर विवाद और बीजेपी की प्रतिक्रिया
कालीघाट मंदिर में मछली और बलि का मांस मां काली को चढ़ाने की एक पुरानी परंपरा है। भक्त इस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। बंगाल के कई मंदिरों में यह सामान्य है, जबकि अन्य राज्यों में मंदिरों में नॉन-वेज खाने पर विवाद उत्पन्न हो जाता है।
यह घटना उस समय हुई जब बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र शास्त्री ने बंगाली हिंदुओं से दुर्गा पूजा के दौरान नॉन-वेज न खाने की अपील की थी। उन्होंने नॉन-वेज खाने वालों को 'पाखंडी' तक कहा था, जिससे राज्य में खान-पान और परंपरा पर चर्चा शुरू हो गई।
बाबा बागेश्वर कहाँ हो आप...??
देखिए बंगाल के सीएम Suvendu Adhikari कालीघाट मंदिर में मछली खा रहे हैं
क्या धीरेन्द्र शास्त्री मुख्यमंत्री का अब विरोध करेंगे और उन्हें ढोंगी कहेंगे...?? 🤔 pic.twitter.com/Yo05hWU9Xn
— Sanju (@SanjuKu79832010) September 11, 2026
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि वे सनातनी हिंदू हैं और महाष्टमी तथा कार्तिक महीने में सात्विक भोजन करते हैं। लेकिन मां काली को चढ़ाई गई मछली या बकरी का प्रसाद वे स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि आज मंदिर में जो भोग चढ़ा, उसमें मछली का सिर, तली हुई मछली और बसंती पुलाव था, जिसे उन्होंने ग्रहण किया।
भाजपा ने इस घटना को बंगाल की परंपरा का सम्मान बताया। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि विवाद वहीं समाप्त होना चाहिए जहां यह शुरू हुआ। कालीघाट में मुख्यमंत्री मां काली का पारंपरिक मछली भोग ग्रहण कर बंगाल की आस्था और रीति-रिवाजों का सम्मान कर रहे हैं। भाजपा बंगाल के हितों और परंपराओं के साथ खड़ी रहेगी।