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सोनम वांगचुक का अनशन: हिंदू राष्ट्र में नागरिकता की कमी

सोनम वांगचुक का अनशन दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है, जिसमें उन्होंने मोदी के हिंदू राष्ट्र में नागरिकता की कमी और भक्तों की भीड़ की स्थिति पर विचार किया है। उनका कहना है कि वर्तमान में नागरिकों की जगह भक्तों की भीड़ बन गई है, जो सवाल पूछने के बजाय केवल आस्था में जीते हैं। वांगचुक का यह अनशन नीट परीक्षा जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ है, लेकिन हिंदू समाज की भीड़ उनके समर्थन में नहीं आई। यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वास्तव में भगवान और भक्तों के नए भारत में कोई लड़ाई संभव है?
 

सोनम वांगचुक का संघर्ष


सोनम वांगचुक, जो कि एक पर्यावरणविद् हैं, ने हाल ही में मोदी के हिंदू राष्ट्र में अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि जनमत को जागरूक करना और सत्ता में बैठे लोगों को समझाना एक ही सिक्के के दो पहलू नहीं हैं। उनके अनुभवों के अनुसार, वर्तमान हिंदू राष्ट्र में एक ही चेहरा है - नरेंद्र मोदी।


इतिहास के संदर्भ में, वांगचुक ने यह भी बताया कि हिंदू समाज ने कभी अपने आराध्य से यह प्रश्न नहीं किया कि उनके रहते हुए यह सब क्यों हुआ। यह सोचने का समय है कि हम हर संकट का समाधान किसी भगवान या उद्धारकर्ता की प्रतीक्षा में क्यों करते हैं।


वर्तमान में, हिंदू नागरिकता की जगह भक्तों की भीड़ में बदल गई है। नागरिक सवाल पूछता है, जबकि भक्त केवल आस्था में जीता है। यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदुओं को किस प्रकार का अवतार दिया है।


सोनम वांगचुक का अनशन, जो कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा है, हिंदू राष्ट्र में कोई अर्थ नहीं रखता। उन्होंने नीट परीक्षा जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन हिंदू समाज की भीड़ उनके समर्थन में नहीं आई।


इसलिए, यह स्पष्ट है कि भगवान और भक्तों के नए भारत में कोई लड़ाई संभव नहीं है। पिछले बारह वर्षों में जो पैटर्न उभरा है, वह यही दर्शाता है कि सत्ता से प्रश्न पूछना अब राष्ट्रद्रोह माना जाता है।